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Thursday, August 30, 2012

रांची की बेटी सम्मानित



राष्ट्रीय खेल दिवस पर बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने झारखंड की तीरंदाज दीपिका को अर्जुन अवार्ड से नवाजा. इससे पहले झारखंड के तीरंदाज संजीव सिंह (1992) और एथलीट चार्ल्स ब्रोमियो (1982) को अर्जुन अवार्ड मिल चुका है

अपनी नौकरी भाई को देना चाहती है सोनाली

धनबाद : नौकरी दिये जाने के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए तेजाब हमले की शिकार सोनाली मुखर्जी ने मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को साधुवाद दिया है। लेकिन, सोनाली नौकरी नहीं करेगी। वह चाहती है कि झारखंड सरकार उसके भाई देवाशीष मुखर्जी को नौकरी दे। तेजाब हमले में 70 प्रतिशत से ज्यादा जल चुकी सोनाली मुखर्जी ने गत दिनों मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से मिलकर न्याय और मदद की फरियाद की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सोनाली को नौकरी देने की घोषणा की थी। इसके बाद राज्य सरकार नौकरी देने के लिए कवायद कर रही है। फिलहाल सोनाली नई दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में भर्ती है। 27 अगस्त को उसके चेहरे की सर्जरी हुई है। चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी होने की प्रक्रिया पूरी होने में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है। जब तक उसका इलाज नहीं हो जाता तब तक नौकरी करना उसके लिए संभव नहीं है। तेजाब हमले में उसकी आंख की रोशनी भी चली गई है। शरीर काफी कमजोर हो गया है। नौकरी के दौरान लगातार आठ घंटे बैठकर समय देना उसके लिए संभव नहीं है। इलाज के दौरान सोनाली के साथ एक आदमी को हमेशा रहना पड़ता है। इस कारण उसके पिता चंडीदास मुखर्जी साथ रहते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसलिए सोनाली चाहती है कि नौकरी उसके भाई को मिले। भाई को नौकरी मिलने से उसे और उसके परिवार को मदद मिल सकेगी। इसके लिए सोनाली की ओर से जल्द ही धनबाद के उपायुक्त के माध्यम ये मुख्यमंत्री को पत्र भेजा जायेगा।

पारा शिक्षकों की हड़ताल से चरमराई शिक्षा व्यवस्था

रांची : पारा शिक्षकों की हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को भी 19,126 उत्क्रमित स्कूलों में बच्चों का पठन-पाठन ठप रहा। हड़ताल से मिड डे मील कार्यक्रम भी पूरी तरह बाधित रहा। जिलों से मिली सूचना के अनुसार पारा शिक्षकों के दोनों गुटों की हड़ताल पूरी तरह सफल रही। पारा शिक्षक कुछ स्कूलों को जबरन बंद कराते भी दिखे। विनोद तिवारी की अध्यक्षता में झारखंड सहयोगी शिक्षा मित्र पारा शिक्षक संघ की बुधवार को हुई बैठक में आंदोलन को और धारदार बनाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत पारा शिक्षक मुख्यमंत्री समेत शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री का पुतला दहन करेंगे। डीएसई, बीईईओ, बीपीओ, बीआरपी-सीआरपी को ज्ञापन सौंपकर समर्थन देने की मांग करने का भी निर्णय लिया गया। इधर प्राथमिक शिक्षा निदेशक ममता ने सभी डीएसई को उन स्कूलों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करने को कहा है, जहां सिर्फ पारा शिक्षक कार्यरत हैं। प्रतिदिन की रिपोर्ट भी मांगी गई है। उपायुक्तों को पत्र भेजकर जबरन स्कूल बंद करानेवालों पर कार्रवाई करने को कहा गया है। पहली सितंबर से 34 हजार शिक्षा मित्र भी हड़ताल पर जागरण ब्यूरो, रांची : पारा शिक्षकों की हड़ताल के बाद झारखंड शिक्षा मित्र संघ के आ ान पर राज्य के 17 हजार शिक्षा मित्रों और इतने ही सहयोगी शिक्षकों ने भी एक सितंबर से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। स्थाईकरण और बारह हजार रुपये मानदेय की मांग को लेकर शिक्षा मित्रों ने यह निर्णय लिया है। शिक्षा मित्र एक सितंबर को विधानसभा के समक्ष अनशन पर बैठेंगे। उल्लेखनीय है कि अभियान विद्यालय से प्राथमिक विद्यालय में उत्क्रमित किए गए स्कूलों में बच्चों के पठन-पाठन की जिम्मेदारी शिक्षा मित्र और सहयोगी शिक्षक संभालते हैं। संघ के अध्यक्ष बृजमोहन पाठक ने कहा है कि सरकार द्वारा उन्हें दिया जा रहा मानदेय काफी कम है।

प्रश्न पत्र लीक, रद्द हो सकती है परीक्षा

दुमका उपायुक्त से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कार्रवाई की जायेगी. मामला सही पाया गया, तो जीव विज्ञान की परीक्षा रद्द की जायेगी. झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से आवेदन जमा करनेवाले विद्यार्थियों के साथ जीव विज्ञान की परीक्षा फिर से ली जा सकती है.
लक्ष्मी सिंह, जैक अध्यक्ष
कार्रवाई के लिए जैक को कहा गया है. मामले की जांच का निर्देश दिया गया है. मामला सही पाये जाने पर संबंधित विषय की परीक्षा रद्द करने को कहा गया है.
बैद्यनाथ राम, शिक्षा मंत्री


दुमका उपायुक्त से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कार्रवाई की जायेगी. मामला सही पाया गया, तो जीव विज्ञान की परीक्षा रद्द की जायेगी. झारखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से आवेदन जमा करनेवाले विद्यार्थियों के साथ जीव विज्ञान की परीक्षा फिर से ली जा सकती है.

लक्ष्मी सिंह, जैक अध्यक्षकार्रवाई के लिए जैक को कहा गया है. मामले की जांच का निर्देश दिया गया है. मामला सही पाये जाने पर संबंधित विषय की परीक्षा रद्द करने को कहा गया है.

बैद्यनाथ राम, शिक्षा मंत्रीप्रप्रभात खबर ने 29 के अंक में छापी थी खबरआसनसोल से लाया गया था : परीक्षा से एक दिन पहले मंगलवार को दुमका में सभी विषयों के प्रश्न पत्र बाजार में होने की चर्चा थी. इन्हें पश्‍चिम बंगाल के आसनसोल से लाया गया था. कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा के बाद पैसे देने की शर्त पर प्रश्न पत्र की छाया प्रति प्राप्त करने के लिए अपने प्रमाण पत्रों को गिरवी रखा था.जीव विज्ञान के सारे सवाल क्रमवार समान पाये गये

जैक ने कहा, डीसी की रिपोर्ट के बाद लिया जायेगा निर्णय

उपायुक्त ने जैक अध्यक्ष को फोन पर पूरी जानकारी दीसामान्य ज्ञान के कई सवाल बाजार में बिक रही प्रश्न पत्र की छाया प्रति में भी थेपरीक्षा का आयोजन जैक करता है. हमने जैक अध्यक्ष को इसकी जानकारी दे दी है. प्रश्न पत्र दुमका से लीक हुआ है, ऐसा नहीं लगता. प्रश्न पत्र उपलब्ध कराते समय सभी पैकेट सील थे. हर्ष मंगला, उपायुक्त,

अपग्रेड उा विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बुधवार को हुई परीक्षा रद्द हो सकती है. परीक्षा से एक दिन पूर्व मंगलवार को प्रश्न पत्र की छाया प्रति दुमका में खुलेआम बिक रही थी. प्रप्रभात खबर ने इससे संबंधित खबर भी प्रकाशित की थी. दुमका में अभ्यर्थियों ने सामान्य ज्ञान और जीव विज्ञान के प्रश्न पत्र की छाया प्रति 50-50 हजार रुपये तक में खरीदी थी. कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा के बाद पैसे देने की शर्त पर अपने प्रमाण पत्र गिरवी रख कर प्रश्न पत्र लिये थे. हालांकि दावा किया जा रहा है कि सभी विषयों के प्रश्न पत्र बिक रहे थे.
डीसी ने किया मिलान
बुधवार को हुई प्रथम पाली की परीक्षा के बाद दुमका के उपायुक्त हर्ष मंगला ने सामान्य ज्ञान के प्रश्न पत्र का मिलान बाजार में बिकी छाया प्रति से किया. इसमें कई प्रश्न क्रमवार एक समान पाये गये. इसके बाद उपायुक्त ने अनुमंडल पदाधिकारी श्याम नारायण राम और एएसपी शैलेंद्र कुमार सिन्हा को द्वितीय पाली में आयोजित जीव विज्ञान की परीक्षा के प्रश्न पत्र का मिलान करने परीक्षा केंद्रों पर भेजा. जांच के क्रम में पाया गया कि जीव विज्ञान में पूछे गये सारे सवाल बाजार में बिकी प्रश्न पत्र की छाया प्रति से क्रमवार हू-ब-हू पाये गये. दोनों विषयों के प्रश्न पत्र के लीक होने की पुष्टि के बाद उपायुक्त ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के अध्यक्ष डॉ लक्ष्मी सिंह से फोन पर बात की. उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया. देर शाम इसकी रिपोर्ट जैक को भेज दी गयी.

Saturday, August 11, 2012

जलने से बची राजधानी

रांची : पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और जिम्मेदार नागरिकों की सूझबूझ ने राजधानी रांची को सांप्रदायिकता की आग में जलने से बचा लिया। म्यांमार और असम में हुई हिंसा का विरोध करने के नाम पर असामाजिक तत्वों ने शुक्रवार को शहर में बवाल मचाने की चेष्टा की पर समय रहते इस पर काबू पा लिया गया। दोनों समुदायों के शांतिप्रिय लोगों ने मोर्चा संभालकर उपद्रवियों को खदेड़ दिया। इस दौरान उपद्रवियों ने मेन रोड, डेलीमार्केट व चर्च रोड की दर्जनभर दुकानों में लूटपाट व तोड़फोड़ की, कई वाहनों के शीशे भी तोड़े डाले व सड़क पर आने-जानेवाले लोगों से दु‌र्व्यवहार किया। महिलाएं व बच्चे भी भी उनके शिकार बने। देखते ही देखते दहशत से मेन रोड व आसपास की दुकानों के शटर गिर गए। इस घटना से शहर में तनाव बरकरार है और हर संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। मौके पर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह ने इस घटना के लिए पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाने के बाद शहर के लोगों से अपनी-अपनी दुकानें खोलने की अपील की। ऐसे हुई घटना : असम-म्यांमार में हिंसा के विरोध में मुस्लिम लोगों ने शुक्रवार को राजभवन मार्च की योजना बनाई थी। इस समाज के बुद्धिजीवियों को अंदेशा था कि इससे तनाव फैल सकता है, अत: मस्जिद से राजभवन मार्च की योजना स्थगित करने का एलान करवा दिया गया। बावजूद इसके, शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद दिन के करीब दो बजे सैकड़ों की संख्या में भीड़ ओवर ब्रिज, सुजाता चौक, सैनिक मार्केट, एकरा मस्जिद होकर मेन रोड की ओर बढ़ने लगी। इसी बीच भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवियों ने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायरलेस व टेट्रा पर पुलिस ने मैसेज प्रसारित कर दिया कि भीड़ उग्र हो गई है, नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त फोर्स की तत्काल जरूरत है। देखते ही देखते सिटी कंट्रोल से दो बस क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम), महिला व पुरुष जवान, सभी थानों की पुलिस अलबर्ट एक्का चौक की ओर दौड़ पड़ी। पुलिस ने भीड़ को अलबर्ट एक्का चौक पर ही रोक दिया। इस बीच तरह-तरह की अफवाह फैलती रही जिससे दूसरे पक्ष के लोग भी जमा हो गए। मौके पर सिटी एसपी विपुल शुक्ला व सदर एसडीएम शेखर जमुआर भी पहुंच गए। दोनों समुदाय में भिड़ंत की नौबत देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा इससे तत्काल भीड़ छंट गई। पुलिस के बल प्रयोग के बाद जुलूस में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने लूटपाट शुरू कर दी व चर्च रोड की दुकानों को निशाना बनाया। इस घटना से दोनों समुदाय आहत थे और आक्रोशित भी। इसके बाद दोनों समुदाय एक साथ काली मंदिर चौक पहुंचे और काली मंदिर चौराहे को जाम कर दिया। उनकी मांग थी कि आरोपियों को पकउ़ा जाए।

बिहार में कमाल, झारखंड बेहाल

धनबाद झारखंड की राजनीति में हाशिये पर पहुंच चुके जनता दल (यूनाइटेड) को पटरी पर लाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व गंभीर दिख रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव संगठन को मजबूत कर जनाधार बढ़ाने की गरज से पार्टी के नेताओं और प्रमुख कार्यकर्ताओं को शनिवार को मैथन में राजनीतिक घुट्टी पिलाएंगे। अलग झारखंड राज्य बनने के बाद पहली बार 11-12 अगस्त को जदयू का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर मैथन में होने जा रहा है। खोयी राजनीतिक जमीन पर दोबारा दखल जदयू के लिए आसान नहीं है। प्रशिक्षण के साथ ही जदयू नेतृत्व संकट का हल निकालने की भी कवायद होगी। बीते 12 साल के राजनीतिक सफर में सबसे ज्यादा नुकसान जदयू को हुआ है। 2000 में जदयू के आठ विधायक थे। 2005 के विधानसभा चुनाव में घटकर छह हो गए। 2009 में चुनाव हुआ तो विधायकों की संख्या दो पर सिमट गयी। जो दो विधायक चुने गए उनमें से सुधा चौधरी की जीत का श्रेय जदयू को जाता है। तमाड़ से चुनाव जीतने वाले गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर जो राज्य के उत्पाद मंत्री हैं, की जीत का श्रेय जदयू को नहीं दिया जा सकता। जदयू में शामिल होने से पहले राजा पीटर ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को पराजित कर तमाम राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। वर्तमान में झारखंड जदयू का सबसे बड़ा संकट नेतृत्व को लेकर है। प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो के क्रियाकलाप से ज्यादातर प्रमुख नेता संतुष्ट नहीं है। संगठन चुनाव में मनमानी को लेकर धनबाद समेत कई जिलों में पार्टी स्पष्ट रूप से विभाजित है। मामला बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में भी है। निपटारे के लिए उन्होंने 7 जुलाई को पटना में पंचायती भी की। उनके निर्देश पर झारखंड में राजनीतिक व सांगठनिक निर्णय लेने के लिए एक संचालन समिति बनायी गयी है। समिति में- प्रदेश खीरू महतो, मंत्री राजा पीटर, विधायक सुधा चौधरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो, लालचंद महतो, दशरथ सिंह, कामता प्रसाद सिंह, रामचंद्र केशरी हैं।

राजनीतिक ईमानदारी दिखाएं प्रधानमंत्री

नई दिल्ली : एक दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को व्यक्तिगत रूप से ईमानदार बता चुके बाबा रामदेव ने शुक्रवार को उन पर भी हमला बोल दिया। बाबा ने प्रधानमंत्री को ललकारते हुए उनसे राजनीतिक ईमानदारी दिखाने की अपील की है। वहीं, रामलीला मैदान में उमड़ी भारी भीड़ के बावजूद उनके साथ नए समर्थक न जुड़ते देख सरकार बेफिक्र बनी हुई है। बाबा रामदेव ने अपने आंदोलन के दूसरे दिन कहा कि हमें एक ईमानदार प्रधानमंत्री की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री काले धन के मामले में राजनीतिक ईमानदारी और इच्छाशक्ति दिखाएं। रामदेव के मुताबिक अगर सरकार काले धन के खिलाफ उनके बताए कदम उठा ले तो देश से न सिर्फ नक्सलवाद बल्कि आतंकवाद का भी सफाया हो सकता है। इसी तरह गरीबी सहित सारी समस्याएं दूर हो सकती हैं। पहले दिन अन्ना हजारे पर किए अपने कटाक्षों के अलावा कई मुद्दों पर रामदेव सफाई देते दिखाई दिए। उन्होंने कहा, लोग अन्ना हजारे और मेरे बीच के समीकरण को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पता नहीं लोगों को ऐसी कहानियां कहां से मिलती हैं। उन्होंने लोकपाल की मांग को कमजोर करने के आरोपों को भी गलत बताया। कहा, कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं सरकारी लोकपाल के पक्ष में हूं। मैं सरकारी लोकपाल के पक्ष में नहीं हूं। बल्कि आम सहमति से लाए गए लोकपाल के पक्ष में हूं। उन्होंने सरकार से किसान आय आयोग गठित करने, मौजूदा भू-अधिग्रहण कानून को खत्म करने, जैविक खाद को बढ़ावा देने, जीएम बीजों पर हमेशा के लिए पाबंदी लगाने और खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक लगाने की मांग की है। रामलीला मैदान में दूसरे दिन भी बड़ी तादाद में रामदेव के समर्थक डटे रहे।

मोदी से बेहतर नीतीश राज

नई दिल्ली : भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के अगले प्रधानमंत्री सबंधी ब्लॉग के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पुरुष मोहन भागवत ने सुशासन में बिहार को गुजरात से बेहतर बता दिया है। उनके इस बयान ने संघ परिवार में बेचैनी बढ़ा दी है। भागवत ने नई दिल्ली में विदेशी मीडिया के कुछ पत्रकारों से बातचीत में जब सुशासन वाले राज्यों की गिनती की तो सबसे पहले बिहार का नाम लिया। उन्होंने कहा कि जनधारणा के अनुसार बिहार विकास के मामलों में गुजरात से भी अच्छा काम कर रहा है। बिहार के बाद उन्होंने गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र का भी नाम लिया। इसे बिहार और नीतीश कुमार की पैरवी के रूप में देखा जा रहा है। मोहन भागवत की राय सार्वजनिक होते ही पहले की तरह उनके इस बयान को लेकर भी लीपापोती शुरू हो गई। ज्ञात हो कि कुछ समय पहले उन्होंने यह कहकर भाजपा-जदयू के बीच तल्खी बढ़ा दी थी कि भारत की बागडोर किसी हिंदुत्ववादी नेता के हाथ में क्यों नहीं होनी चाहिए? उन्होंने यह बयान नीतीश कुमार की इस राय पर दिया था कि कोई सेक्युलर नेता ही प्रधानमंत्री होना चाहिए। मोहन भागवत के ताजा बयान पर राजनीतिक हलचल मचते ही संघ यह सफाई देने में जुट गया कि उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार के शासन को गुजरात के नरेंद्र मोदी शासन से ज्यादा अंक नहीं दिए हैं। संघ के राम माधव ने इसे मीडिया के सिर थोपते हुए कहा कि भागवत के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार, भागवत से सीधा सवाल पूछा गया था और उसका सीधा जवाब दिया गया। बिहार की जो स्थिति थी उसके परिप्रेक्ष्य में अब वहां हालात बहुत बदले हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि सुशासन के मामले में गुजरात को बिहार से नीचे रखा गया। दिलचस्प यह है कि बिहार के भाजपा नेता संघ प्रमुख के आकलन को सही बताने में जुट गए हैं। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद डॉ. सीपी ठाकुर ने कहा कि भागवत का आकलन ठीक है। बिहार का विकास सभी क्षेत्रों में हो रहा है। हम यह नहीं कह रहे कि गुजरात में विकास नहीं हो रहा है। वहां भी हो रहा है, लेकिन यदि भागवत बिहार के सुशासन को एक नंबर पर रख रहे हैं तो यह स्वागत योग्य है। मोहन भागवत के बयान को नीतीश को मनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आडवाणी के हाल के ब्लॉग को दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा था। इस ब्लॉग में उन्होंने गैर कांग्रेस और गैर भाजपा प्रधानमंत्री की भविष्यवाणी की थी। प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर राजग में भ्रम की स्थिति इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि भाजपा के अंदर से अलग-अलग आवाजें उठ रही हैं। खुद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी जहां राजग को साधने की कोशिश में जुटे हैं वहीं पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद यशवंत सिन्हा ने पटना जाकर यह जताने में कोताही नहीं की कि जो व्यक्ति जातिवादी राजनीति कर रहा उसे धर्मनिरपेक्षता की बात नहीं करनी चाहिए। जाहिर तौर पर यह सीधे नीतीश पर टिप्पणी थी।

Sunday, August 5, 2012

बाल-बाल बचे रेल अधिकारी

धनबाद/ललपनिया : धनबाद रेल मंडल के सीआइसी सेक्शन में साइडिंग का निरीक्षण करने पहंुचे रेलवे अधिकारियों का सैलून डुमरी-दनिया रेलवे स्टेशन के बीच पटरी पर पड़े एक बड़े चट्टान से टकरा गया। इस दुर्घटना में सीनियर डीओएम वेद प्रकाश, कोल एरिया मैनेजर योगेन्द्र पासवान सहित रेलवे के कई वरीय अधिकारी बाल-बाल बच गये। घटना तड़के 04:05 बजे की है। बरसात के कारण रेलवे ट्रैक से सटी पहाड़ी से खिसक कर चट्टान गिर पड़ा था। दुर्घटना की वजह से लगभग छह घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सैलून का बे्रक सिस्टम फेल हो गया। दुर्घटना की जानकारी बरकाकाना व गोमिया रेलवे स्टेशन के अधिकारियों को मिलते ही आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंचे, जहां क्रेन की मदद से चट्टान हटाए गए। इसके बाद सैलून के ब्रेक सिस्टम को दुरुस्त कर रवाना किया गया। सीआइसी जा रही थी टीम : रेल अधिकारियों की टीम सीआइसी दौरे पर जा रही थी। उन्हें बरकाकाना में रुकना था, जहां पूर्व मध्य रेल मुख्यालय के मुख्य परिचालन प्रबंधक सहित अन्य आला अधिकारी भी पहुंचने वाले थे। कई ट्रेनें फंसी : दुर्घटना के बाद रेल परिचालन दुरुस्त करने में लगभग छह घंटे का समय लगा। इस दौरान बरकाकाना गोमो सवारी गाड़ी, गोमो चोपन सवारी गाड़ी घंटो फंसी रही।

एनआरएचएम के 243 करोड़ का नहीं दिया हिसाब

रांची : उपायुक्तों, सिविल सर्जनों और कार्यपालक अभियंताओं आदि ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई राशि में 552 करोड़ रुपए का डीसी बिल (खर्च का हिसाब) नहीं दिया। इनमें सबसे अधिक राशि (243 करोड़) केंद्र द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य अभियान (एनआरएचएम) की है। यह राशि योजना लागू होने (2005) से 2011 तक निकाली गई थी, जिसके निकासी पदाधिकारी विभाग के अवर सचिव हैं। शेष राशि राज्य बजट की है, जो 2006 के बाद निकाली गई। स्वास्थ्य विभाग ने सभी उपायुक्तों, सिविल सर्जनों, कार्यपालक अभियंताओं आदि को पत्र लिखकर एक सप्ताह में डीसी बिल महालेखाकार के पास जमा कर राशि समायोजित करने का निर्देश दिया है। इसकी समीक्षा के लिए 17-18 अगस्त को संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को तलब किया गया है। इससे पहले उपायुक्तों को अपने स्तर से समीक्षा करने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि एसी बिल के माध्यम से राशि की अग्रिम निकासी विशेष परिस्थितियों में ही की जाती है। राशि निकालनेवाले अधिकारियों को एक महीने के अंदर डीसी बिल महालेखाकर के पास जमाकर राशि का समायोजन कराना होता है। पूर्व में ली गई अग्रिम राशि के समायोजन के बिना दूसरी बार अग्रिम राशि नहीं निकाली जा सकती। निकाली गई राशि को अधिक दिनों तक खर्च नहीं करना या उसे समायोजित नहीं करना वित्तीय अनियमितता है। जिस राशि का डीसी बिल नहीं जमा किया गया, उसमें उपायुक्तों द्वारा निकाली गई राशि भी शामिल है। रिम्स निदेशक द्वारा निकाले गए 21 करोड़ रुपए का समायोजन नहीं कराया गया। बाकी राशि सिविल सर्जनों, एसीएमओ, उप विकास आयुक्तों, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा निकाली गई है।

Friday, August 3, 2012

अगस्त का महीना, फिल्मों का नगीना

धनबाद अगस्त का महीना आपके लिए फुल इंज्वाय भरा होनेवाला है। दर्शकों के लिए यह एक सुपर वीकेंड होगा। एक साथ कई श्रेणियों की फिल्में रिलीज हो रही हैं। इसमें पूजा भट्ट और पोर्न स्टार सनी लियोन की बोल्ड फिल्म जिस्म-2, अनुराग कश्यप की गैंग्स ऑफ वासेपुर-2, सल्लू भैया और चिकनी चमेली (कैटरीना कैफ) की एक था टाईगर, राउडी राठौर यानी अक्षय कुमार की जोकर और निर्देशन से एक्टिंग में कदम रखने वाली फराह खान की शीरीं फरहाद की तो निकल पड़ी प्रमुख फिल्में शामिल है। इतना ही नहीं ये जो मोहब्बत है, सिडनी विद लव और 3डी एनिमेशन फिल्म कृष्ण और कंस भी रिलीज हो रही है। इस महीने कई बड़े व छोटे बैनर की लगभग 11 फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। ये हैं खास फिल्में जिस्म-2 : पोर्न स्टार सनी लियोन, अरुणोदय सिंह का गठीला बदन और रणदीप हुडा के साथ हॉट सीन का तड़का देखने को मिलेगा। सनी का क्रेज और बोल्डनेस देखने को दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 : इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी, हुमा कुरैशी और जीशान कादरी को देखने का मौका मिलेगा। कोल माफिया से शुरू लड़ाई अब वर्चस्व की जंग बनकर फिल्म में दिखाई देगा। एक था टाईगर : हॉलीवुड अंदाज में एक्शन, सलमान स्टाइल की मनोरंजन, पाकिस्तान-हिंदुस्तान से लेकर विदेशों में जासूसी का जलवा दिखेगा। गीत-संगीत और ट्रेलर को बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। जोकर : राउडी राठौर की कामयाबी के बाद अक्षय टाइप की एक और फिल्म। पागलपुर गांव को भारत के नक्शे में लाने और विश्र्व का ध्यान आकर्षित करने की कहानी है जोकर। शीरी फरहाद की तो निकल पड़ी : फराह खान और कॉमेडी किंग बोमन ईरानी स्टाइल फिल्म। पहली बार फराह खान की दिखेगी एक्टिंग।

बीसीसीएल में सभी ठेकों के लिए ई-टेंडरिंग

धनबाद : बीसीसीएल ने पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम उठाया है। सीएमडी टीके लाहिड़ी की अध्यक्षता में गुरुवार को कोयला भवन में जीएम कोआर्डिनेशन की बैठक में निर्णय लिया गया कि अब तमाम ठेका कार्य इ-टेंडरिंग के जरिए दिया जाएगा। यह व्यवस्था पहली अक्टूबर से लागू होगी। इस बीच आवश्यक तकनीकी तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा वेंडर रजिस्ट्रेशन भी होगा। बीसीसीएल की रेलवे साइडिंग में शक्तिपुंज एक्सप्रेस से डंपर टकराने के बाद कंपनी ने रेल अधिकारियों से परामर्श कर हर साइडिंग में लोडिंग की दुर्घटना रहित व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। इसके लिए अब साइडिंग में गाडि़यों के घुमाने लायक जगह होगी। गाड़ी अब रेलवे ट्रैक पर नहीं जा पाएगी। कंपनी परिवहन कार्य दस हजार टन से बढ़ाकर 25 हजार टन रोजाना करेगी। समीक्षा में पाया गया कि वाहन तो हैं, लेकिन चालक उपलब्ध नहीं है। इस कारण निर्णय लिया गया कि उस कोलकर्मी को मौका दिया जाएगा जो ड्राइविंग जानते हैं। चालू भूमिगत खदानों का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया गया। अगस्त में 25 लाख टन कोयला उत्पादन एवं 33 लाख टन डिस्पैच का लक्ष्य तय किया गया। पिछले जुलाई में उत्पादन 24.67 लाख टन जबकि डिस्पैच 25 लाख टन से ज्यादा हुआ था। बैठक में डीपी पीई कच्छप, डीटी आपरेशन डीसी झा, डीटी पीएनपी ए सरकार, डीएफ ए साहा समेत सभी एरिया जीएम एवं विभागाध्यक्ष शामिल थे। सीआइएसएफ के साथ बैठक : बीसीसीएल के आला प्रबंधन की सीआइएसएफ डीआइजी के साथ बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि सीआइएसएफ सभी एरिया में गश्त बढ़ाएगी। बैठक में कोल संपत्ति की रक्षा पर भी चर्चा हुई।

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