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Saturday, August 11, 2012

राजनीतिक ईमानदारी दिखाएं प्रधानमंत्री

नई दिल्ली : एक दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को व्यक्तिगत रूप से ईमानदार बता चुके बाबा रामदेव ने शुक्रवार को उन पर भी हमला बोल दिया। बाबा ने प्रधानमंत्री को ललकारते हुए उनसे राजनीतिक ईमानदारी दिखाने की अपील की है। वहीं, रामलीला मैदान में उमड़ी भारी भीड़ के बावजूद उनके साथ नए समर्थक न जुड़ते देख सरकार बेफिक्र बनी हुई है। बाबा रामदेव ने अपने आंदोलन के दूसरे दिन कहा कि हमें एक ईमानदार प्रधानमंत्री की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री काले धन के मामले में राजनीतिक ईमानदारी और इच्छाशक्ति दिखाएं। रामदेव के मुताबिक अगर सरकार काले धन के खिलाफ उनके बताए कदम उठा ले तो देश से न सिर्फ नक्सलवाद बल्कि आतंकवाद का भी सफाया हो सकता है। इसी तरह गरीबी सहित सारी समस्याएं दूर हो सकती हैं। पहले दिन अन्ना हजारे पर किए अपने कटाक्षों के अलावा कई मुद्दों पर रामदेव सफाई देते दिखाई दिए। उन्होंने कहा, लोग अन्ना हजारे और मेरे बीच के समीकरण को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पता नहीं लोगों को ऐसी कहानियां कहां से मिलती हैं। उन्होंने लोकपाल की मांग को कमजोर करने के आरोपों को भी गलत बताया। कहा, कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं सरकारी लोकपाल के पक्ष में हूं। मैं सरकारी लोकपाल के पक्ष में नहीं हूं। बल्कि आम सहमति से लाए गए लोकपाल के पक्ष में हूं। उन्होंने सरकार से किसान आय आयोग गठित करने, मौजूदा भू-अधिग्रहण कानून को खत्म करने, जैविक खाद को बढ़ावा देने, जीएम बीजों पर हमेशा के लिए पाबंदी लगाने और खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर रोक लगाने की मांग की है। रामलीला मैदान में दूसरे दिन भी बड़ी तादाद में रामदेव के समर्थक डटे रहे।

मोदी से बेहतर नीतीश राज

नई दिल्ली : भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के अगले प्रधानमंत्री सबंधी ब्लॉग के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पुरुष मोहन भागवत ने सुशासन में बिहार को गुजरात से बेहतर बता दिया है। उनके इस बयान ने संघ परिवार में बेचैनी बढ़ा दी है। भागवत ने नई दिल्ली में विदेशी मीडिया के कुछ पत्रकारों से बातचीत में जब सुशासन वाले राज्यों की गिनती की तो सबसे पहले बिहार का नाम लिया। उन्होंने कहा कि जनधारणा के अनुसार बिहार विकास के मामलों में गुजरात से भी अच्छा काम कर रहा है। बिहार के बाद उन्होंने गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र का भी नाम लिया। इसे बिहार और नीतीश कुमार की पैरवी के रूप में देखा जा रहा है। मोहन भागवत की राय सार्वजनिक होते ही पहले की तरह उनके इस बयान को लेकर भी लीपापोती शुरू हो गई। ज्ञात हो कि कुछ समय पहले उन्होंने यह कहकर भाजपा-जदयू के बीच तल्खी बढ़ा दी थी कि भारत की बागडोर किसी हिंदुत्ववादी नेता के हाथ में क्यों नहीं होनी चाहिए? उन्होंने यह बयान नीतीश कुमार की इस राय पर दिया था कि कोई सेक्युलर नेता ही प्रधानमंत्री होना चाहिए। मोहन भागवत के ताजा बयान पर राजनीतिक हलचल मचते ही संघ यह सफाई देने में जुट गया कि उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार के शासन को गुजरात के नरेंद्र मोदी शासन से ज्यादा अंक नहीं दिए हैं। संघ के राम माधव ने इसे मीडिया के सिर थोपते हुए कहा कि भागवत के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार, भागवत से सीधा सवाल पूछा गया था और उसका सीधा जवाब दिया गया। बिहार की जो स्थिति थी उसके परिप्रेक्ष्य में अब वहां हालात बहुत बदले हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि सुशासन के मामले में गुजरात को बिहार से नीचे रखा गया। दिलचस्प यह है कि बिहार के भाजपा नेता संघ प्रमुख के आकलन को सही बताने में जुट गए हैं। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद डॉ. सीपी ठाकुर ने कहा कि भागवत का आकलन ठीक है। बिहार का विकास सभी क्षेत्रों में हो रहा है। हम यह नहीं कह रहे कि गुजरात में विकास नहीं हो रहा है। वहां भी हो रहा है, लेकिन यदि भागवत बिहार के सुशासन को एक नंबर पर रख रहे हैं तो यह स्वागत योग्य है। मोहन भागवत के बयान को नीतीश को मनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आडवाणी के हाल के ब्लॉग को दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा था। इस ब्लॉग में उन्होंने गैर कांग्रेस और गैर भाजपा प्रधानमंत्री की भविष्यवाणी की थी। प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर राजग में भ्रम की स्थिति इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि भाजपा के अंदर से अलग-अलग आवाजें उठ रही हैं। खुद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी जहां राजग को साधने की कोशिश में जुटे हैं वहीं पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद यशवंत सिन्हा ने पटना जाकर यह जताने में कोताही नहीं की कि जो व्यक्ति जातिवादी राजनीति कर रहा उसे धर्मनिरपेक्षता की बात नहीं करनी चाहिए। जाहिर तौर पर यह सीधे नीतीश पर टिप्पणी थी।

Sunday, August 5, 2012

बादल फटा 26 लोग बहे

> एक हजार करोड़ से अधिक का नुकसान
नई दिल्ली : शनिवार का दिन कई प्रदेशों के लिए तबाही का संदेश लेकर आया। पौ फटने पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से हुई भारी तबाही का मंजर सामने था, दर्जनों लोग लापता। उत्तराखंड का हाल सबसे बुरा है। भारी बारिश के कहर से पूरे पर्वतीय क्षेत्र में जनजीवन पटरी से उतर गया, कई क्षेत्रों का मुख्यालयों से संपर्क कट गया। एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अंदेशा है। जम्मू-कश्मीर में 22 लोग बमुश्किल बचाए जा सके। उत्तर प्रदेश भी बाढ़ के चलते बर्बादी की चपेट में है। सहारनपुर में दस लोग बहे लेकिन उनमें से आठ ही बचाए जा सके। प्रदेश के पूर्वी भाग में घाघरा, शारदा, सरयू और गंगा का तांडव शुरू हो गया है। खतरे के निशान लांघते हुए इन नदियों के पानी ने लाखों लोग बेघर कर दिए हैं। हजारों गांव पानी से घिर गए हैं। बड़ी संख्या में गांवों के नदियों के कटान में समाने की खबर है। बारह घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश ने उत्तराखंड के पहाड़ों पर तबाही मचा दी है। उत्तरकाशी के गंगाघाटी इलाके में सर्वाधिक नुकसान हुआ। यहां फायर सर्विस के तीन जवानों समेत 26 लोग असीगंगा और बरसाती नालों के उफान में बह गए। अभी तक दो शव बरामद हुए हैं। बाकी की तलाश की जा रही है। वहां एक फायर स्टेशन मलवे के ढेर में तब्दील हो गया है। इसके अलावा 70 मकान और 10 होटल जमींदोज हो गए, जबकि उत्तरकाशी शहर की पूरी जोशियाड़ा बस्ती समेत करीब 200 मकान खतरे की जद में आ गए। इन सभी को खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। गंगोरी में गंगोत्री राजमार्ग पर बने मोटर पुल के साथ ही कई पुल, सड़कें व घरों के बाहर खड़ी गाडि़यां बह गई। जिला प्रशासन ने लगभग 600 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान होने का आकलन किया है। चमोली जिले में धौलीगंगा नदी पर बनी एनटीपीसी की तपोपन विष्णुगाड़ बिजली परियोजना का कॉफर बांध टूट गया। बांध क्षेत्र को जोड़ने वाला पुल व सड़क भी बह गई। जिले में एक मकान ध्वस्त होने से उसमें दो बच्चों की दबकर मौत हो गई। बदरीनाथ हाइवे पर कंचनगंगा के पास दो यात्री वाहन बह गए। चारधाम यात्रा मार्ग भी बाधित होने से करीब ढाई हजार यात्री जहां-तहां फंसे हैं। पुलिस, प्रशासन के साथ ही सेना और आइटीबीपी राहत में एवं बचाव कार्याें में जुटी है। हिमाचल एक मरा, सौ करोड़ का नुकसान : मनाली के पर्यटन स्थल सोलंगनाला के समीप सेरीनाला में बादल फटने से आई बाढ़ के कारण करीब सौ करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। बाढ़ के कारण पलचान के निकट सड़क बहने से मनाली-लेह मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। हजारों लोग उस पर जहां-तहां फंस गए हैं। बाढ़ से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दो बेली ब्रिज सहित पांच स्थानों में सड़क को नुकसान हुआ है। पुलिस ने नदी से एक शव बरामद किया है। मृतक की पहचान मनाली निवासी तेंग्जिन अंगदुई के रूप में हुई है। कश्मीर में बचाए 22 गए , भूस्खलन : कश्मीर के कठुआ और जम्मू में शनिवार को बाढ़ में 22 लोग फंस गए, जिन्हें बाद में पुलिस और ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कश्मीर के रामबन सेक्टर में हुए भूस्खलन के कारण शनिवार को श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। भारी बारिश के चलते श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर कई जगह भूस्खलन हुआ है। यातायात रोक दिया गया है। भू स्खलन के चलते वैष्णो देवी यात्रा भी रोके जाने की सूचना है। बाढ़ के चलते चिनाब, तवी आदि ज्यादातर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। उप्र में नदियां उफान पर, दो की मौत : शिवालिक की पहाडि़यों पर मूसलाधार बारिश से सहारनपुर में सहस्त्रा नदी उफान पर आ गई है। शुक्रवार रात पठानपुरा-बाकरपुर के बीच सड़क पर आए पानी में टाटा सूमो बह गई। इसमें सवार दस लोगों में से आठ को कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया, जबकि दो की मौत हो गई। जोरदार बारिश के बाद डाट मंदिर से पहले चट्टान खिसकने से दिल्ली-देहरादून राजमार्ग करीब 10 घंटे बंद रहा। नरौरा व हरिद्वार बांध से पानी छोड़े जाने से फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

साइना को एक करोड रुपये देगी हरियाणा सरकार

चंडीगढ़ : लंदन ओलंपिक में शनिवार को कांस्य पदक जीतने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को हरियाणा सरकार एक करोड़ रुपये का इनाम देगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने साइना को पदक जीतने पर बधाई दी है। लंदन ओलंपिक 2012 में वह हरियाणा की दूसरी खिलाड़ी हैं, जिसने पदक जीता है। इससे पूर्व जाने-माने निशानेबाज गगन नारंग ने कांस्य पदक जीतकर देश और राज्य का नाम रोशन किया है।

Friday, August 3, 2012

आतंकी मंजर इमाम के घर इश्तेहार चस्पा

रांची : पुणे में बुधवार को हुए धमाकों के तुरंत बाद गुरुवार को रांची पहुंची हैदराबाद एनआइए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की टीम ने इंडियन मुजाहिदीन संगठन से जुड़े मंजर इमाम के घर व बरियातू थाने में इश्तेहार चिपका दिया। इश्तेहार केरल के एर्नाकुलम स्थित एनआइए के स्पेशल कोर्ट से जारी किया गया है। इश्तेहार के अनुसार तीन सितंबर तक अगर मंजर आत्मसमर्पण नहीं करता है तो उसके घर की कुर्की- जब्ती की जाएगी। पूर्व में भी एनआइए ने मंजर के आवास पर छापेमारी की थी, लेकिन गिरफ्तारी में सफल नहीं हो पाई। गुरुवार को जांच एजेंसी के लौटते ही मंजर के परिजनों ने इश्तेहार फाड़ दिया। उनका आरोप है कि एजेंसी मंजर को फंसा रही है। मालूम हो कि वर्ष 2008 में केरल में इंडियन मुजाहिदीन की बैठक हुई थी। इसमें बरियातू का दानिश व मंजर भी शामिल हुए। बैठक के तुरंत बाद अहमदाबाद व सूरत में बम ब्लास्ट हुआ। मामले की जांच केरल पुलिस कर रही थी। 2010 में मामला एनआइए, हैदराबाद को स्थानांतरित कर दिया गया। दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन मंजर अब भी फरार है। मुंबई में सीरियल ब्लास्ट के बाद भी 14 जुलाई, 2011 को एनआइए रांची पहुंची थी। टीम बड़ोदरा में गिरफ्तार दानिश रियाज के साथी मंजर इमाम की तलाश में पहुंची थी। मंजर की तलाश में सूरत क्राइम ब्रांच की टीम भी रांची में छापेमारी कर चुकी है।

Thursday, August 2, 2012

रक्षा बंधन विशेष

पुणे में सीरियल ब्लास्ट

विस्फोट स्थल पर मौजूद कूड़ेदान से सुराग की तलाश में बम निरोधक दस्ता।

पुणे : गृह मंत्रालय से पी. चिदंबरम की विदाई के बाद सुशील कुमार शिंदे के कमान संभालते ही उनके गृह राज्य महाराष्ट्र के पुणे के अतिव्यस्त इलाके में बुधवार शाम सिलसिलेवार चार धमाके हुए। मौके पर पहुंची एटीएस टीम ने पांचवां और छठा बम निष्कि्रय कर दिया। कम तीव्रता वाले इन धमाकों में दो व्यक्ति घायल हुए हैं। विस्फोटों के सिलसिले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार भी किया गया है। जांच में मदद के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की टीमें दिल्ली और मुंबई से रवाना करने के साथ ही दिल्ली, मुंबई समेत कुल 14 शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने सुनियोजित ढंग से धमाके होने कारण आतंकी हमले से इन्कार नहीं किया है। पुणे के डेक्कन क्षेत्र स्थित अतिव्यस्त जंगली महाराज मार्ग पर सिर्फ आधे किलोमीटर के दायरे में ये विस्फोट बुधवार शाम 7.27 से 8.15 बजे के बीच हुए। पहला विस्फोट गंधर्व रेस्टोरेंट के नजदीक, दूसरा मैकडोनॉल्ड रेस्टोरेंट के पास, तीसरा इससे कुछ ही दूरी पर देना बैंक के एटीएम के बाहर और चौथा गरवारे पुल के पास शू व‌र्ल्ड के बाहर हुआ। इनमें गंधर्व रेस्टोरेंट व मैकडोनॉल्ड के विस्फोट बाहर रखे कचरे के डिब्बों में और देना बैंक व गरवारे पुल के विस्फोट पास खड़ी साइकिलों की टोकरियों में हुए हैं। गौरतलब है कि जून में मुंबई के मराठी चैनल साम मराठी को एक पत्र मिला था। इसमें बताया गया था कि 13 जून से 15 अगस्त के बीच पुणे में विस्फोट किए जाएंगे। पुणे के पुलिस आयुक्त गुलाबराव पोल के मुताबिक विस्फोटस्थलों से पेंसिल सेल व छोटे डेटोनेटर मिले हैं। विस्फोटक के रूप में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किए जाने की सूचना है। विस्फोटों की तीव्रता काफी कम थी, क्योंकि जिस साइकिल की टोकरी में विस्फोट हुआ, उसको भी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। इन विस्फोटों में घायल व्यक्ति को पुणे के ससून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ससून अस्पताल के डॉ. अजय चंदनवाले ने बताया कि पाटिल को पेट, चेहरे और आंख के पास चोटें आई हैं। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है और वह होश में है। ल्ल शेष कृष्ठ 15 कर गृह मंत्री के बदलते पुणे में धमाके सीरियल ब्लास्ट 6 शिंदे के गृह राज्य में सिलसिलेवार चार बम विस्फोट 6 कम तीव्रता के धमाकों में दो व्यक्ति घायल, एक गिरफ्तार 6 केंद्रीय गृह सचिव ने नहीं किया आतंकी हमले से इन्कार

Wednesday, August 1, 2012

बिजली फेल, थमी रेल

झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित 19 राज्यों में बत्ती गुल, उत्तरी के साथ पूर्वी व उत्तर-पूर्वी ग्रिड ठप

नई दिल्ली : एक दिन पहले का झटका लोग भूले भी नहीं थे कि 24 घंटे के भीतर दूसरी बार उनका सामना बिजली संकट से हो गया। इस बार उत्तरी ग्रिड के साथ पूर्वी व उत्तर-पूर्वी ग्रिड भी फेल हो गए। परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम समेत 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और चंडीगढ़ में शाम से लेकर देर शाम और कहीं-कहीं देर रात तक बिजली गुल रही। इससे देश की 60 करोड़ आबादी का जनजीवन ठहर सा गया। दिल्ली मेट्रो के अलावा भारतीय रेलवे की लंबी दूरी की बिजली से चलने वाली सैकड़ों ट्रेनें जहां की तहां खड़ी हो गई। इस बार की गड़बड़ी के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को जिम्मेदार बताया जा रहा है, जिन्होंने उत्तरी ग्रिड में अपने कोटे से बहुत ज्यादा बिजली घसीट ली। पहली बार पैदा हुए इस तरह के हालात में पूरा केंद्रीय तंत्र बदहवास नजर आया। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे व उनका अमला काफी देर तक बगलें झांकता दिखा। बाद में सबने संकट का ठीकरा राज्यों पर फोड़कर पल्ला झाड़ लिया। कोई यह बताने की स्थिति में नहीं था कि आखिर ग्रिडों को राज्यों की मनमर्जी पर कैसे और क्यों छोड़ दिया गया है और इन पर समय रहते लगाम लगाने का तंत्र आखिर क्यों गायब है। दोपहर से शाम तक दिल्ली व अन्य महानगरों में ट्रैफिक लाइटें गुल होने से यातायात के हालात एकदम बिगड़े रहे। मेट्रो तथा मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में फंसे यात्रियों की हालत खस्ता रही। गाजियाबाद से मुगलसराय के बीच सवा सौ ट्रेनें घंटों रुकी रहीं। दिल्ली से गुवाहाटी, हावड़ा, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, अमृतसर, मुंबई, लखनऊ के बीच सैकड़ों ट्रेनें लेट हो गई। दिल्ली में मेट्रो रेल प्रबंधन ने यात्रियों को बीच में ही उतार कर उनके पैसे वापस किए। केंद्र व तमाम राज्यों में सरकारी व निजी दफ्तरों, अस्पतालों व कारखानों में शुरू में पावर बैकअप से काम चलाने की कोशिश की गई। अनेक जगहों पर कर्मचारियों को समय से पहले छुट्टी दे दी गई। जिन पेट्रोल पंपों के पास बैकअप था वे तो चलते रहे, बाकियों ने बंदी की तख्तियां टांग दीं। इस दौरान एटीएम बंद होने से लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। सोमवार को जहां 15 घंटे में तकरीबन 35 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे, वहीं मंगलवार के महा विद्युत संकट ने देश की आधी आबादी को अपनी चपेट में ले लिया।

Tuesday, July 31, 2012

Power crisis now trips 19 states, 600 million people hit

New Delhi: The power crisis that hit northern India turned into a larger blackout a day later Tuesday to affect as many as 19 states not just in the north but also in the east and northeast, paralysing essential services such as rail and metro operations, besides causing massive traffic snarls.

'Grid incident occurred at 1 p.m., affecting the northern, eastern and northeastern grids. The system is under restoration,' said the official website of the eastern grid, among the such systems managed by the state-run Power System Operation Corp Ltd.

The states affected Tuesday were Jammu and Kashmir, Himachal Pradesh, Punjab, Haryana, Delhi, Rajasthan, Uttar Pradesh, Bihar, West Bengal, Odisha, Jharkhand, Sikkim, Assam, Meghalaya, Tripura, Nagaland, Manipur, Mizoram and Arunachal Pradesh.

These states account for half of India's 1.2 billion poplation.

Power Minister Sushil Kumar Shinde, who had constituted a committee to probe the failure Monday, attributed the collapse on the second straight day to overdrawing of power by some states and said efforts were on to fetch electricity from other regions.

'Alternative arrangements have been made. I have put all my men at work. We are getting power from western grid. We will try to restore services of the Metro and the railways first,' Shinde told reporters.

Sunday, July 29, 2012

अन्ना का आमरण अनशन आज से

नई दिल्ली : एक साल पहले रामलीला ग्राउंड में 13 दिन के उपवास से सरकार में खलबली मचा चुके अन्ना हजारे लोकपाल के मुद्दे पर रविवार से आमरण अनशन पर बैठेंगे। चार दिन का अल्टीमेटम खत्म होने बाद शनिवार को जंतर-मंतर पर अन्ना ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के हाथों देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है। राजनीति में विकल्प देने का संकेत देते हुए हजारे ने पहली बार यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह 2014 के चुनाव में खुलकर उम्मीदवारों का प्रचार करेंगे। भीड़ इकट्ठी न करने की आलोचना का जवाब देते हुए अन्ना ने कहा कि यह दृष्टि का दोष है। देश के 400 जिलों में एक साथ आंदोलन चल रहा है। लोकपाल को लेकर उन्हें सरकार ने बहुत ठगा है। अब उन्हें किसी पर भरोसा नहीं है।देश न तो कांग्रेस के हाथ सुरक्षित है और न ही भाजपा के हाथों में। देश के लिए यह अच्छी बात नहीं है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए लोकपाल की मांग पर बार-बार अनशन करना पड़ रहा है। बहरहाल, इस बार वह लोकपाल के लिए आमरण अनशन करेंगे। राजनीतिक दलों की ओर से बार-बार चुनाव लड़ने की चुनौती पर अन्ना ने कहा कि वह खुद तो चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन अच्छे लोगों के लिए प्रचार जरूर करेंगे। टीम अन्ना देश का दौरा कर अच्छे लोगों से चुनाव में उतरने की अपील करेंगे। उनके चरित्र, ईमानदारी व समाज सेवा की पड़ताल होगी और फिर इंटरनेट पर उनके नाम डाले जाएंगे, ताकि कोई भी अपनी टिप्पणी दे सके। संकेत स्पष्ट है कि 2014 के चुनाव में अन्ना अब सक्रियता से चुनावी अभियान में दिख सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसकी वजह उन्होंने यह बताई, विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 15-20 करोड़ रुपये, जबकि लोकसभा चुनाव लड़ने वाले 50 करोड़ खर्च करते हैं। वोट के लिए मतदाताओं को 15-20 हजार रुपये दिए जाते हैं। जो लोग चुनाव लड़ते हैं, वे पैसा बनाते हैं। उन्हें पता नहीं कि इसे कहां रखें, लिहाजा वे इसे विदेश भेजते हैं। इसलिए न तो मैं चुनाव लडू़ंगा, और न ही कोई पार्टी बनाऊंगा।

असम हिंसा राष्ट्र पर कलंक

कोकराझाड़ (असम) : असम की हिंसा को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने राष्ट्र पर कलंक करार दिया है। उनके इस कथन ने अटल बिहारी वाजपेयी के उस वक्तव्य की याद ताजा कर दी है, जिसमें उन्होंने 2002 के गुजरात दंगे को देश पर कलंक बताते हुए राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म का पालन करने की नसीहत दी थी। शनिवार को हालात का जायजा लेने यहां पहुंचे प्रधानमंत्री ने माना कि हिंसा पर नियंत्रण में शुरुआत में काफी दिक्कतें आई। उन्होंने राहत एवं पुनर्वास कार्य के लिए 300 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि हिंसा की जांच कराई जाएगी। वहीं, राज्य के प्रमुख विपक्षी दल एआइयूडीएफ ने सीबीआइ जांच की मांग की है। कोकराझाड़ में राहत शिविर का दौरा करने के बाद प्रधानमंत्री ने पीडि़तों को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार हालात को सामान्य करने और उनके जख्म भरने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि यह जातीय हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। इससे राष्ट्र पर धब्बा लगा है। प्रधानमंत्री ने कोकराझाड़ कॉमर्स कॉलेज में चल रहे राहत शिविर में विस्थापितों से मुलाकात के बाद कहा कि वह उनका दुख-दर्द बांटने आए हैं। इस राहत शिविर में करीब 1,500 लोग शरण लिए हुए हैं। हिंसा का कारण पूछने पर मनमोहन ने कहा कि शांति लौटने के बाद हम कारणों की समीक्षा करेंगे। इसी दौरान मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से केंद्र पर उनके आरोप के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा था। एक दिन पहले गोगोई ने केंद्र पर सेना भेजने में देरी का आरोप लगाया था। इससे पहले मौसम खराब होने के कारण प्रधानमंत्री और अन्य लोगों को लेकर जा रहे तीन हेलिकॉप्टरों को बीच रास्ते से गुवाहाटी लौटना पड़ा। प्रधानमंत्री के साथ राज्य के गवर्नर जानकी बल्लभ पटनायक, तरुण गोगोई, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भुवनेश्वर कलिता भी मौजूद थे। यहां हवाईअड्डे के अधिकारियों ने बताया कि हेलिकॉप्टर खराब मौसम के कारण गोसाईगांव हेलीपैड पर नहीं उतर सकते थे, इसलिए वे लौट आए। राज्य कांग्रेस के एक अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर गुवाहाटी हवाईअड्डे पर इसलिए लौटे क्योंकि उनमें एक में तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी। बाद में प्रधानमंत्री वायुसेना के विमान से कोकराझाड़ पहुंचे। राज्य के बोडो इलाकों में सप्ताह भर से जारी हिंसा में 53 लोग मारे जा चुके हैं, करीब तीन लाख लोग बेघर हो गए हैं। असम सरकार का दावा है कि चार जिलों में फैली हिंसा पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। 11 हजार सुरक्षाकर्मी होंगे तैनात : नई दिल्ली से प्रेट्र के अनुसार केंद्र ने हिंसा प्रभावित जिलों में 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए राज्य सरकार को अधिकृत कर दिया है। मेडिकल टीमों एवं दवा के साथ विशेष विमान को असम भेजा गया है। अभी तक अ‌र्द्धसैनिक बलों के 7300 जवान कोकराझाड़, चिरांग और धुबरी जिलों में तैनात किए जा चुके हैं। 11,600 सुरक्षाकर्मियों को हालात सुधारने के लिए राज्य सरकार तैनात कर सकती है। ईसाई संगठन ने भी घेरा : शिलांग से प्रेट्र के अनुसार मुस्लिम सांसदों के बाद ईसाइयों के संगठन ने भी हिंसा के लिए सरकार को दोषी ठहराया है। भारत के गिरजाघरों के राष्ट्रीय कौंसिल (एनसीसीआइ) के महासचिव रोजर गायकवाड़ ने शुक्रवार को गृह मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि अगर घुसपैठ को लेकर केंद्र व असम सरकार सावधान रहती तो हिंसा को रोका जा सकता था। उनके मुताबिक करीब दस हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर अवैध प्रवासियों का कब्जा है। अब वे दूसरे जिलों में बढ़ रहे हैं।

Saturday, July 28, 2012

आर्थिक समाचार

सेंसेक्स 199 अंक उछला

मुंबई : बाजार में शुक्रवार को लगातार दो सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। विदेशी बाजारों में मजबूती के बीच आइसीआइसीआइ बैंक के जोरदार तिमाही नतीजों से उत्साहित निवेशकों ने चौतरफा लिवाली की। इससे बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 199.37 अंक यानी 1.20 प्रतिशत उछलकर 16839.19 पर पहुंच गया। गुरुवार को यह 16639.82 अंक पर बंद हुआ था। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 56.85 अंक यानी 1.13 प्रतिशत चढ़कर 5099.85 पर बंद हुआ। आइसीआइसीआइ बैंक के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों ने बाजार में जान फूंकी। जून को समाप्त पहली तिमाही में इस निजी बैंक का मुनाफा करीब 36 प्रतिशत बढ़ा है।

Friday, July 27, 2012

घाटकुरी मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में पश्चिम सिंहभूम के घाटकुरी की पंाच लौह अयस्क खदानों का पट्टा देने की अनुशंसा रद करने पर अपनी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए छह खनन कंपनियों की याचिकाएं बुधवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आरएम लोधा व न्यायमूर्ति एचएल गोखले की पीठ ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड, आधुनिक एलॉय एंड पावर लिमिटेड, अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, इस्पात इंडस्ट्रीज लिमिटेड, झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड तथा प्रकाश इस्पात लिमिटेड की याचिकाएं खारिज कर दीं। देश की शीर्षस्थ अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। मामले में अर्जुन मुंडा की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2004 में उपरोक्त कंपनियों को घाटकुरी खनन क्षेत्र में लौह अयस्क का खनन पट्टा देने की अनुशंसा की थी। उस समय मधु कोड़ा खनन मंत्री हुआ करते थे। बाद में वह अनुशंसा वापस ले ली गई थी। इसी को कंपनियों ने झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां याचिकाएं खारिज हो गई। इसके बाद कंपनियां सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।

बड़ी भूमिका की ओर राहुल

सोनिया गांधी की इच्छा, पीएमओ में बनें मंत्री

नई दिल्ली संगठन और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी के लिए हामी भर चुके कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बढ़ते दखल और विस्तार के निशान दिखने लगे हैं। गुजरात, हिमाचल प्रदेश और त्रिपुरा में टिकटों के वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तय करने में अपनी युवा टीम को जिम्मेदारी देकर राहुल ने इस दफा खुद के कार्यकारी या उपाध्यक्ष बनने जैसी अपनी बढ़ी भूमिका के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। वहीं, सरकार में सोनिया गांधी की इच्छा के मुताबिक राहुल के प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री के नए किरदार को स्वीकार करने पर अभी मंथन जारी है। अति विशिष्ट सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चाहती हैं कि राहुल अब सरकार में प्रशासनिक अनुभव भी लें। संगठन में पिछले आठ साल से राहुल सक्रिय हैं ही, उनकी मां की सोच है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले वह प्रशासनिक स्तर पर भी अनुभवी हो जाएं। इस दृष्टि से सोनिया और उनके सलाहकार चाहते हैं कि राहुल को प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री के तौर पर भूमिका निभानी चाहिए। इससे उन्हें सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली और उनकी जिम्मेदारियों का अनुभव मिलेगा। हालांकि, इसमें एक खतरा यह भी है कि राहुल के पीएमओ में बैठते ही सबका ध्यान प्रधानमंत्री के बजाय उनकी तरफ केंद्रित हो जाएगा। इससे मनमोहन सिंह को कमजोर करने का संदेश भी जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने अभी भी सरकार में भूमिका के सवाल पर पत्ते नहीं खोले हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा उनके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय का विकल्प भी तलाशा गया है। मगर राहुल सरकार में किस स्वरूप में शामिल होंगे, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो सका है। वहीं, संगठन में बड़ी भूमिका के लिए न सिर्फ वह तैयार हो चुके हैं, बल्कि उस पर काम भी शुरू कर दिया है। अब तक सिर्फ उत्तर प्रदेश के बारे में ही सारे फैसलों तक खुद को सीमित रखे रहे राहुल अब इस साल होने वाले तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसके पुख्ता संकेत उन्होंने विधानसभा टिकटों की छानबीन के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी में अपनी टीम को जिम्मेदारी सौंप कर दे दिए हैं। हिमाचल प्रदेश के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी में शीला दीक्षित को अध्यक्ष बनाया गया है तो लंबे समय तक राहुल के साथ संबद्ध सचिव रहे गृह राज्यमंत्री भंवर जितेंद्र सिंह को सदस्य के रूप में भेजा गया है। इसी तरह त्रिपुरा में केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद टिकटों की छानबीन करेंगे। कांग्रेस के लिहाज से सबसे अहम राज्य गुजरात में स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष जहां केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री डॉ. सीपी जोशी को बनाया गया है। वहीं टीम राहुल के प्रमुख सदस्य पेट्रोलियम राज्यमंत्री आरपीएन सिंह भी इसमें सदस्य हैं।

Wednesday, July 25, 2012

प्रथम नागरिक

प्रणब मुखर्जी की ताजपोशी आज

कोलकाता : राष्ट्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी अपनों के बीच शपथ लेंगे। प्रणब के पुत्र अभिजीत मुखर्जी रविवार को ही दिल्ली चले गए थे। प्रणब की पत्नी, दो बेटे, एक बेटी व नाती-नातिन समेत मुखर्जी परिवार के 25 सदस्य समारोह में उपस्थित रहेंगे। मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर संसदीय क्षेत्र से भी एक प्रतिनिधिनमंडल प्रणब की ताजपोशी का गवाह बनने गया है। जंगीपुर से प्रणब ने पिछले दो लोकसभा चुनाव जीते हैं। बीरभूम के किर्नाहार गांव में रहने वाली प्रणब की बड़ी बहन अन्नापूर्णा देवी अस्वस्थ होने के कारण समारोह के लिए नहीं जा सकीं, लेकिन टीवी पर अपने पोल्टू को राष्ट्रपति बनता देखेंगी। उनका बेटा दिल्ली गया है।

असम में हिंसा बेकाबू

कोकराझाड़ : असम में सांप्रदायिक हिंसा की आग फैलती जा रही है। मंगलवार को कोकराझाड़ में हिंसा पर उतारू भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें चार लोग मारे गए। वहां पर कफ्र्यू लगाने के साथ ही प्रशासन ने देखते ही गोली मारने का आदेश सुरक्षा बलों को दे दिया है। बोडो और अल्पसंख्यक समुदाय की ताजा झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। कोकराझाड़ से शुरू हुई हिंसा पड़ोसी जिले धुबड़ी से होते हुए मंगलवार को चिरांग और सोणितपुर जिलों में भी फैल गई। बोंगईगांव और उदालगुड़ी जिलों में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बांग्लादेश सीमा के नजदीक बनी अशांत स्थिति पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चिंता जतायी है और उससे कड़ाई से निपटने का निर्देश दिया है। ताजा घटनाक्रम में चिरांग जिले के चार गांवों में 70 घरों को फूंक दिया गया। हिंसा के गांवों तक फैल जाने के कारण बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हो रहा है। 50 हजार से ज्यादा लोग राहत शिविरों की शरण ले चुके हैं, करीब इतने ही लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। हिंसा रोकने के प्रशासन के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। सर्वाधिक प्रभावित कोकराझाड़ जिले में सेना तैनात कर दी गई है और वहां जारी कफ्र्यू के दौरान देखते ही गोली मारने के आदेश हैं। धुबड़ी और चिरांग जिलों में रात का कफ्र्यू लगाया गया है। बोडो लोगों की रिहायश वाले राज्य के आठ जिलों में तनाव का माहौल है। हालात से निपटने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से अ‌र्द्धसैनिक बलों की 50 और कंपनियां मांगी हैं। कोकराझाड़ के गोसाईगांव से गुजर रही गुवाहाटी राजधानी एक्सप्रेस पर पथराव में चार कोचों को नुकसान पहुंचा। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से हिंसा को काबू करने के लिए हर संभव उपाय प्रयोग में लाने का निर्देश दिया है। हिंसा की शुरुआत गुरुवार को कोकराझाड़ में दो छात्र नेताओं की गोली मारकर हत्या से हुई थी। अगले दिन चार पूर्व बोडो आतंकियों के मारे जाने से हिंसा भड़क उठी। 30 हजार रेलयात्री फंसे : हिंसाग्रस्त क्षेत्र में रेल यातायात में पड़े व्यवधान पर मंगलवार को रेल मंत्री मुकुल रॉय ने गृह मंत्री पी चिदंबरम और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से फोन पर बात कर रेलयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। असम में 37 ट्रेनों में करीब 30 हजार यात्री असुरक्षित और अभावों के हालात में बीच रास्ते में फंसे हैं। 26 ट्रेनें रद करनी पड़ी हैं। रास्ते में फंसी व विलंबित ट्रेनों में डिब्रूगढ़ कामरूप एक्सप्रेस, गुवाहाटी गरीब रथ, नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस, कामाख्या एक्सप्रेस, अवध असम एक्सप्रेस, सिकंदराबाद-गुवाहाटी एक्सप्रेस, गया एक्सप्रेस, गुवाहाटी-बेंगलूर एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़-दिल्ली ब्रंापुत्र मेल, गुवाहाटी-हावड़ा सरायघाट एक्सप्रेस तथा गुवाहाटी-जम्मू तवी एक्सप्रेस हैं।

Tuesday, July 24, 2012

जबर्दस्त महंगाई सरकार असहाय

नई दिल्ली : पिछले तीन माह में जरूरी चीजों की कीमतों में सबसे अप्रत्याशित उछाल के बीच सरकार महंगाई को लेकर लगभग असहाय सी हो गई है। महंगाई को संभालने वाला तंत्र ठप है। मूल्यवृद्धि पर नजर रखने वाली मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक करीब छह माह से नहीं हुई है। महंगाई के आकलन को लेकर रिजर्व बैंक व सरकार में गहरे मतभेदों ने बात और बिगाड़ दी है। कीमतों के ताजा आंकड़े भी चक्कर में डाल रहे हैं। थोक कीमतों में महंगाई सधी है, मगर उपभोक्ता बाजार तप रहा है। इन हालात ने महंगाई को लेकर सरकार में एक अजीब किस्म का नीतिगत शून्य सरकार .. पैदा कर दिया है। बाजार में जरूरी चीजों की खुदरा कीमतों में बढ़त के लिहाज से यह सबसे बुरा दौर है। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें पिछले दो साल से ही काफी ऊंची हैं, मगर मार्च से अब तक इनमें सबसे तेज उछाल आया है। यह बढ़ोतरी दाल, तेल से लेकर फैक्ट्री में बने सामानों तक है। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़े प्रमाण हैं कि केवल मार्च से अब तक चार माह में ही खाद्य तेल और दालों के दाम पांच से लेकर आठ रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। मार्च से अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में आलू दोगुना और टमाटर ढाई गुना महंगा हुआ है। इधर बजट में बढ़ी एक्साइज ड्यूटी के कारण फैक्ट्री सामान की कीमतों में इजाफे ने स्थिति और बिगाड़ दी है। खराब मानसून के कारण जब महंगाई में नई लपट उठने वाली है, तब सरकार का महंगाई नियंत्रण तंत्र पूरी तरह सुन्न पड़ गया है। कीमतों में बढ़ोतरी रोकने के लिए पिछले छह माह से केंद्र सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। महंगाई की मॉनीटरिंग के लिए केंद्रीय मंत्रियों की समिति को छह माह में एक बैठक का मौका तक नहीं मिला। महंगाई पर सचिवों की एक समिति भी है। इस समिति की तीन माह से बैठक नहीं हुई। अलबत्ता खाद्य मंत्री केवी थॉमस ने जागरण से कहा कि कीमतें नियंत्रण में हैं। इसलिए मॉनीटरिंग की जरूरत नहीं पड़ी है। महंगाई के आंकड़ों को लेकर भी सरकार के भीतर असमंजस चरम पर है। महंगाई के असर को कम करने के जिम्मेदार रिजर्व बैंक व वित्त मंत्रालय में गहरे मतभेद दिख रहे हैं। ब्याज दरों में कमी बेसी का आधार बनने वाली मुद्रास्फीति की मूलभूत दर (पॉलिसी इंफ्लेशन) जून के आंकड़े के अनुसार पांच फीसद से नीचे रही है। इस मुद्रास्फीति दर में खाद्य उत्पादों की कीमतें शामिल नहीं होतीं। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर इसी दौरान 7.25 फीसदी पर रही है, लेकिन इसमें उपभोक्ता कीमतों की झलक नहीं होती। उपभोक्ता कीमतों वाली खुदरा महंगाई की दर दस फीसद से ऊपर बनी हुई।

अब भी गुस्से में शरद पवार

प्रधानमंत्री के भोज का राकांपा ने किया बहिष्कार

नई दिल्ली : राकांपा के संप्रग में रहने या न रहने का फैसला अगले एक-दो दिन के लिए टल गया है, लेकिन गठबंधन से संकट के बादल अभी छंटे नहीं है। सोमवार को हुई राकांपा की बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ। हालांकि शरद पवार का गुस्सा बरकरार है। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की विदाई के मौके पर प्रधानमंत्री की तरफ से आयोजित भोज का पवार व उनकी टीम ने बहिष्कार किया। राकांपा के मंत्रियों ने अपनी सरकारी गाड़ी भी मंत्रालयों को वापस कर दी है और सोमवार को सवेरे राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर प्रणब मुखर्जी को बधाई देने भी अपनी निजी कार से गए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और राकांपा के बीच संकट के समाधान पर बातचीत जारी है। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने मसले का हल निकलने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि गठबंधन में ऐसी बातें होती रहती हैं। आम तौर से ऐसी बातों का हल बातचीत से निकल आता है। सूत्रों के मुताबिक, विवाद की असली जड़ महाराष्ट्र से जुड़े विषय और कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी है। खास तौर से राकांपा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज च ाण से बेहद नाराज हैं। उन सब विषयों पर कांग्रेस-राकांपा के बीच परदे के पीछे से वार्ता जारी है। इस बातचीत का ही नतीजा था कि सोमवार को राकांपा ने दिल्ली में हुई अपनी निर्णायक बैठक का फैसला टाल दिया है। इसके साथ ही विवाद का पूरा केंद्र दिल्ली के बजाय महाराष्ट्र स्थानांतरित हो गया है। अब मंगलवार को राकांपा की बैठक पुणे में होगी और बुधवार तक वह अपना फैसला सुना सकती है। सोमवार की बैठक के बाद राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि एक-दो दिन में आखिरी फैसला हो जाएगा। अंतिम फैसले से पहले राकांपा महाराष्ट्र के नेताओं के साथ एक और बैठक करेगी। पटेल इस सवाल से कन्नी काट गए कि वे संप्रग सरकार में शामिल हैं या बाहर से समर्थन दे रहे हैं। पटेल ने कहा कि हम संप्रग के सहयोगी हैं और 2014 तक साथ रहेंगे। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के साथ रहेंगे। हालांकि, किस स्वरूप में रहेंगे यानी बाहर से समर्थन देंगे या सरकार में शामिल रहेंगे, इस पर अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं पर राकांपा को बदनाम करने का आरोप लगाया। साथ ही कांग्रेस आलाकमान से नेताओं की बयानबाजी पर रोक लगाने की अपील भी की। जब पटेल से निजी गाड़ी में प्रणब से मिलने जाने और प्रधानमंत्री के भोज में नहीं जाने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ये हमारा फैसला है। जब तक हम काम नहीं करेंगे, तब तक हम सरकारी साधनों का इस्तेमाल नहीं करेंगे और न ही किसी सरकारी कार्यक्रम में शरीक होंगे। अगाथा पर बढ़ा रहस्य : राष्ट्रपति चुनाव में राकांपा से अलग होकर प्रणब मुखर्जी के खिलाफ उतरने लड़ने वाले पीए संगमा की बेटी और केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री अगाथा संगमा के भविष्य पर रहस्य बढ़ गया है। वह राकांपा कोटे से ही मंत्री हैं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि अगाथा ने पवार को इस्तीफा सौंप दिया है। उन्हें दफ्तर नहीं जाने और संसद की कार्यवाही से भी दूर रहने के लिए कहा गया है। अगाथा ने भी पवार को भरोसा दिया है कि वह पार्टी के निर्देशों का पालन करेंगी।

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