Sunday, July 29, 2012

असम हिंसा राष्ट्र पर कलंक

कोकराझाड़ (असम) : असम की हिंसा को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने राष्ट्र पर कलंक करार दिया है। उनके इस कथन ने अटल बिहारी वाजपेयी के उस वक्तव्य की याद ताजा कर दी है, जिसमें उन्होंने 2002 के गुजरात दंगे को देश पर कलंक बताते हुए राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म का पालन करने की नसीहत दी थी। शनिवार को हालात का जायजा लेने यहां पहुंचे प्रधानमंत्री ने माना कि हिंसा पर नियंत्रण में शुरुआत में काफी दिक्कतें आई। उन्होंने राहत एवं पुनर्वास कार्य के लिए 300 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि हिंसा की जांच कराई जाएगी। वहीं, राज्य के प्रमुख विपक्षी दल एआइयूडीएफ ने सीबीआइ जांच की मांग की है। कोकराझाड़ में राहत शिविर का दौरा करने के बाद प्रधानमंत्री ने पीडि़तों को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार हालात को सामान्य करने और उनके जख्म भरने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि यह जातीय हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। इससे राष्ट्र पर धब्बा लगा है। प्रधानमंत्री ने कोकराझाड़ कॉमर्स कॉलेज में चल रहे राहत शिविर में विस्थापितों से मुलाकात के बाद कहा कि वह उनका दुख-दर्द बांटने आए हैं। इस राहत शिविर में करीब 1,500 लोग शरण लिए हुए हैं। हिंसा का कारण पूछने पर मनमोहन ने कहा कि शांति लौटने के बाद हम कारणों की समीक्षा करेंगे। इसी दौरान मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से केंद्र पर उनके आरोप के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा था। एक दिन पहले गोगोई ने केंद्र पर सेना भेजने में देरी का आरोप लगाया था। इससे पहले मौसम खराब होने के कारण प्रधानमंत्री और अन्य लोगों को लेकर जा रहे तीन हेलिकॉप्टरों को बीच रास्ते से गुवाहाटी लौटना पड़ा। प्रधानमंत्री के साथ राज्य के गवर्नर जानकी बल्लभ पटनायक, तरुण गोगोई, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भुवनेश्वर कलिता भी मौजूद थे। यहां हवाईअड्डे के अधिकारियों ने बताया कि हेलिकॉप्टर खराब मौसम के कारण गोसाईगांव हेलीपैड पर नहीं उतर सकते थे, इसलिए वे लौट आए। राज्य कांग्रेस के एक अधिकारी ने बताया कि हेलिकॉप्टर गुवाहाटी हवाईअड्डे पर इसलिए लौटे क्योंकि उनमें एक में तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी। बाद में प्रधानमंत्री वायुसेना के विमान से कोकराझाड़ पहुंचे। राज्य के बोडो इलाकों में सप्ताह भर से जारी हिंसा में 53 लोग मारे जा चुके हैं, करीब तीन लाख लोग बेघर हो गए हैं। असम सरकार का दावा है कि चार जिलों में फैली हिंसा पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। 11 हजार सुरक्षाकर्मी होंगे तैनात : नई दिल्ली से प्रेट्र के अनुसार केंद्र ने हिंसा प्रभावित जिलों में 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए राज्य सरकार को अधिकृत कर दिया है। मेडिकल टीमों एवं दवा के साथ विशेष विमान को असम भेजा गया है। अभी तक अ‌र्द्धसैनिक बलों के 7300 जवान कोकराझाड़, चिरांग और धुबरी जिलों में तैनात किए जा चुके हैं। 11,600 सुरक्षाकर्मियों को हालात सुधारने के लिए राज्य सरकार तैनात कर सकती है। ईसाई संगठन ने भी घेरा : शिलांग से प्रेट्र के अनुसार मुस्लिम सांसदों के बाद ईसाइयों के संगठन ने भी हिंसा के लिए सरकार को दोषी ठहराया है। भारत के गिरजाघरों के राष्ट्रीय कौंसिल (एनसीसीआइ) के महासचिव रोजर गायकवाड़ ने शुक्रवार को गृह मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि अगर घुसपैठ को लेकर केंद्र व असम सरकार सावधान रहती तो हिंसा को रोका जा सकता था। उनके मुताबिक करीब दस हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर अवैध प्रवासियों का कब्जा है। अब वे दूसरे जिलों में बढ़ रहे हैं।

No comments:

Post a Comment

<iframe style="width:120px;height:240px;" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no" frameb...