Saturday, August 11, 2012

मोदी से बेहतर नीतीश राज

नई दिल्ली : भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के अगले प्रधानमंत्री सबंधी ब्लॉग के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पुरुष मोहन भागवत ने सुशासन में बिहार को गुजरात से बेहतर बता दिया है। उनके इस बयान ने संघ परिवार में बेचैनी बढ़ा दी है। भागवत ने नई दिल्ली में विदेशी मीडिया के कुछ पत्रकारों से बातचीत में जब सुशासन वाले राज्यों की गिनती की तो सबसे पहले बिहार का नाम लिया। उन्होंने कहा कि जनधारणा के अनुसार बिहार विकास के मामलों में गुजरात से भी अच्छा काम कर रहा है। बिहार के बाद उन्होंने गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र का भी नाम लिया। इसे बिहार और नीतीश कुमार की पैरवी के रूप में देखा जा रहा है। मोहन भागवत की राय सार्वजनिक होते ही पहले की तरह उनके इस बयान को लेकर भी लीपापोती शुरू हो गई। ज्ञात हो कि कुछ समय पहले उन्होंने यह कहकर भाजपा-जदयू के बीच तल्खी बढ़ा दी थी कि भारत की बागडोर किसी हिंदुत्ववादी नेता के हाथ में क्यों नहीं होनी चाहिए? उन्होंने यह बयान नीतीश कुमार की इस राय पर दिया था कि कोई सेक्युलर नेता ही प्रधानमंत्री होना चाहिए। मोहन भागवत के ताजा बयान पर राजनीतिक हलचल मचते ही संघ यह सफाई देने में जुट गया कि उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार के शासन को गुजरात के नरेंद्र मोदी शासन से ज्यादा अंक नहीं दिए हैं। संघ के राम माधव ने इसे मीडिया के सिर थोपते हुए कहा कि भागवत के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार, भागवत से सीधा सवाल पूछा गया था और उसका सीधा जवाब दिया गया। बिहार की जो स्थिति थी उसके परिप्रेक्ष्य में अब वहां हालात बहुत बदले हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि सुशासन के मामले में गुजरात को बिहार से नीचे रखा गया। दिलचस्प यह है कि बिहार के भाजपा नेता संघ प्रमुख के आकलन को सही बताने में जुट गए हैं। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद डॉ. सीपी ठाकुर ने कहा कि भागवत का आकलन ठीक है। बिहार का विकास सभी क्षेत्रों में हो रहा है। हम यह नहीं कह रहे कि गुजरात में विकास नहीं हो रहा है। वहां भी हो रहा है, लेकिन यदि भागवत बिहार के सुशासन को एक नंबर पर रख रहे हैं तो यह स्वागत योग्य है। मोहन भागवत के बयान को नीतीश को मनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आडवाणी के हाल के ब्लॉग को दूसरे परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा था। इस ब्लॉग में उन्होंने गैर कांग्रेस और गैर भाजपा प्रधानमंत्री की भविष्यवाणी की थी। प्रधानमंत्री पद के दावेदार को लेकर राजग में भ्रम की स्थिति इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि भाजपा के अंदर से अलग-अलग आवाजें उठ रही हैं। खुद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी जहां राजग को साधने की कोशिश में जुटे हैं वहीं पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद यशवंत सिन्हा ने पटना जाकर यह जताने में कोताही नहीं की कि जो व्यक्ति जातिवादी राजनीति कर रहा उसे धर्मनिरपेक्षता की बात नहीं करनी चाहिए। जाहिर तौर पर यह सीधे नीतीश पर टिप्पणी थी।

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