Saturday, August 11, 2012

बिहार में कमाल, झारखंड बेहाल

धनबाद झारखंड की राजनीति में हाशिये पर पहुंच चुके जनता दल (यूनाइटेड) को पटरी पर लाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व गंभीर दिख रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव संगठन को मजबूत कर जनाधार बढ़ाने की गरज से पार्टी के नेताओं और प्रमुख कार्यकर्ताओं को शनिवार को मैथन में राजनीतिक घुट्टी पिलाएंगे। अलग झारखंड राज्य बनने के बाद पहली बार 11-12 अगस्त को जदयू का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर मैथन में होने जा रहा है। खोयी राजनीतिक जमीन पर दोबारा दखल जदयू के लिए आसान नहीं है। प्रशिक्षण के साथ ही जदयू नेतृत्व संकट का हल निकालने की भी कवायद होगी। बीते 12 साल के राजनीतिक सफर में सबसे ज्यादा नुकसान जदयू को हुआ है। 2000 में जदयू के आठ विधायक थे। 2005 के विधानसभा चुनाव में घटकर छह हो गए। 2009 में चुनाव हुआ तो विधायकों की संख्या दो पर सिमट गयी। जो दो विधायक चुने गए उनमें से सुधा चौधरी की जीत का श्रेय जदयू को जाता है। तमाड़ से चुनाव जीतने वाले गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर जो राज्य के उत्पाद मंत्री हैं, की जीत का श्रेय जदयू को नहीं दिया जा सकता। जदयू में शामिल होने से पहले राजा पीटर ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को पराजित कर तमाम राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। वर्तमान में झारखंड जदयू का सबसे बड़ा संकट नेतृत्व को लेकर है। प्रदेश अध्यक्ष खीरू महतो के क्रियाकलाप से ज्यादातर प्रमुख नेता संतुष्ट नहीं है। संगठन चुनाव में मनमानी को लेकर धनबाद समेत कई जिलों में पार्टी स्पष्ट रूप से विभाजित है। मामला बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में भी है। निपटारे के लिए उन्होंने 7 जुलाई को पटना में पंचायती भी की। उनके निर्देश पर झारखंड में राजनीतिक व सांगठनिक निर्णय लेने के लिए एक संचालन समिति बनायी गयी है। समिति में- प्रदेश खीरू महतो, मंत्री राजा पीटर, विधायक सुधा चौधरी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो, लालचंद महतो, दशरथ सिंह, कामता प्रसाद सिंह, रामचंद्र केशरी हैं।

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