Saturday, August 11, 2012

जलने से बची राजधानी

रांची : पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और जिम्मेदार नागरिकों की सूझबूझ ने राजधानी रांची को सांप्रदायिकता की आग में जलने से बचा लिया। म्यांमार और असम में हुई हिंसा का विरोध करने के नाम पर असामाजिक तत्वों ने शुक्रवार को शहर में बवाल मचाने की चेष्टा की पर समय रहते इस पर काबू पा लिया गया। दोनों समुदायों के शांतिप्रिय लोगों ने मोर्चा संभालकर उपद्रवियों को खदेड़ दिया। इस दौरान उपद्रवियों ने मेन रोड, डेलीमार्केट व चर्च रोड की दर्जनभर दुकानों में लूटपाट व तोड़फोड़ की, कई वाहनों के शीशे भी तोड़े डाले व सड़क पर आने-जानेवाले लोगों से दु‌र्व्यवहार किया। महिलाएं व बच्चे भी भी उनके शिकार बने। देखते ही देखते दहशत से मेन रोड व आसपास की दुकानों के शटर गिर गए। इस घटना से शहर में तनाव बरकरार है और हर संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। मौके पर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह ने इस घटना के लिए पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाने के बाद शहर के लोगों से अपनी-अपनी दुकानें खोलने की अपील की। ऐसे हुई घटना : असम-म्यांमार में हिंसा के विरोध में मुस्लिम लोगों ने शुक्रवार को राजभवन मार्च की योजना बनाई थी। इस समाज के बुद्धिजीवियों को अंदेशा था कि इससे तनाव फैल सकता है, अत: मस्जिद से राजभवन मार्च की योजना स्थगित करने का एलान करवा दिया गया। बावजूद इसके, शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद दिन के करीब दो बजे सैकड़ों की संख्या में भीड़ ओवर ब्रिज, सुजाता चौक, सैनिक मार्केट, एकरा मस्जिद होकर मेन रोड की ओर बढ़ने लगी। इसी बीच भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवियों ने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वायरलेस व टेट्रा पर पुलिस ने मैसेज प्रसारित कर दिया कि भीड़ उग्र हो गई है, नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त फोर्स की तत्काल जरूरत है। देखते ही देखते सिटी कंट्रोल से दो बस क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम), महिला व पुरुष जवान, सभी थानों की पुलिस अलबर्ट एक्का चौक की ओर दौड़ पड़ी। पुलिस ने भीड़ को अलबर्ट एक्का चौक पर ही रोक दिया। इस बीच तरह-तरह की अफवाह फैलती रही जिससे दूसरे पक्ष के लोग भी जमा हो गए। मौके पर सिटी एसपी विपुल शुक्ला व सदर एसडीएम शेखर जमुआर भी पहुंच गए। दोनों समुदाय में भिड़ंत की नौबत देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा इससे तत्काल भीड़ छंट गई। पुलिस के बल प्रयोग के बाद जुलूस में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने लूटपाट शुरू कर दी व चर्च रोड की दुकानों को निशाना बनाया। इस घटना से दोनों समुदाय आहत थे और आक्रोशित भी। इसके बाद दोनों समुदाय एक साथ काली मंदिर चौक पहुंचे और काली मंदिर चौराहे को जाम कर दिया। उनकी मांग थी कि आरोपियों को पकउ़ा जाए।

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