Sunday, July 22, 2012

विजिलेंस के पुलिस इंस्पेक्टरों को मिला जांच का अधिकार

रांची. विजिलेंस के पुलिस इंस्पेक्टरों को अब विभिन्न मामलों के जांच की जिम्मेदारी दी जाएगी। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद गृह विभाग ने शनिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। सरकार के इस निर्णय का सीधा लाभ निगरानी ब्यूरो को मिलेगा जो भ्रष्टाचार के मामलों की अनुसंधान इकाई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अब तक यह अधिकार डीएसपी को प्राप्त था।

क्या होगा लाभ : निगरानी में मुकदमों का अंबार है। बिहार से भी कई प्रारंभिक जांच एवं मुकदमे झारखंड को मिले हैं। डीएसपी स्तर के अधिकारियों को ही अनुसंधान की शक्ति होने की वजह से एक ही अधिकारी पर कई मुकदमों का बोझ है। इसका सीधा असर मुकदमों की जांच पर पड़ रहा था। अनुसंधान की गति धीमी थी। अब इंस्पेक्टर स्तर पर जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद जांचकर्ता अधिकारियों की संख्या बढ़ेगी और उनपर मुकदमों का बोझ कम होगा।

बिना वारंट गिरफ्तार करने की शक्ति
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 से 15 तक से संबंधित कांडों में अनुसंधान करने के साथ ही बिना वारंट के ही अभियुक्त को गिरफ्तार करने की शक्ति होती है। पहले यह शक्ति डीएसपी को थी जो अब इंस्पेक्टर को भी सौंप दी गई है।
विजिलेंस मामलों की जांच के लिए इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को शक्ति दिए जाने से निगरानी ब्यूरो को लाभ होगा। जांच के काम में तेजी आएगी लेकिन ब्यूरो में एसपी स्तर के अधिकारियों की संख्या बढ़ानी होगी ताकि पुलिस इंस्पेक्टरो द्वारा किए गए अनुसंधान का बारीकी से सुपरविजन किया जा सके।ज्ज् नेयाज अहमद, पूर्व डीजी विजलेंस ब्यूरो

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