Sunday, July 22, 2012
पावर चाह रहे हैं पवार
नई दिल्ली : संप्रग सरकार के आठ साल के कार्यकाल के दौरान पहली बार तेवर दिखाने वाले मराठा सरदार शरद पवार इतनी आसानी से हथियार डालने वाले नहीं। सिर्फ मंत्रालय नहीं, बल्कि सरकार में सभी सहयोगियों की बाकायदा हिस्सेदारी के मुद्दे को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने से पहले पवार मानने के मूड में नहीं। केंद्र में पूर्ववर्ती राजग सरकार सरीखी व्यवस्था की पैरवी करते हुए पवार संप्रग में समन्वय और नीतिगत फैसलों में सहयोगी दलों को भरोसे में लिए जाने जैसे बड़े सवालों पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार छोड़ने को भी तैयार हैं। हालांकि, अभी दोनों जगहों पर पार्टी बाहर से समर्थन देते रहने की बात जरूर कही जा रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पवार ने अपनी बात दो-टूक लहजे में कह कर गेंद पूरी तरह कांग्रेस के पाले में डाल दी है। सोमवार दोपहर तक राकांपा नेतृत्व कांग्रेस के जवाब का इंतजार करेगी। इसके बाद बैठक कर वह सरकार में रहने या न रहने पर अंतिम फैसला कर लेगी। वहीं, कांग्रेस सूत्रों को भरोसा है कि इस मुद्दे का हल निकाल लिया जाएगा, लेकिन पवार की मांगों पर पार्टी नेतृत्व अभी तक कोई फैसला नहीं कर सका है। कांग्रेस के सूत्र मान रहे हैं कि पवार की असली समस्या केंद्र से ज्यादा महाराष्ट्र को लेकर है। उस मसले पर केंद्रीय नेतृत्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज च ाण को दिल्ली तलब कर पवार की शिकायतों को सुनने के लिए कह सकता है। वहीं, केंद्रीय स्तर पर पवार की समन्वय की मांग के मद्देनजर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में पवार, एंटनी और लोकसभा में नेता सदन समेत तीन लोगों की कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा है। सूत्रों के मुताबिक, राकांपा इससे संतुष्ट नहीं है। दरअसल, राकांपा सूत्रों का कहना है कि केंद्र में नंबर दो का कोई मुद्दा ही नहीं है। वास्तव में कांग्रेस की तरफ से महंगाई बढ़ने या हर मसले के लिए पवार पर दोष मढ़ने की परंपरा से राकांपा चिढ़ गई है। साथ ही वे अटल बिहारी वाजपेयी की राजग सरकार के समन्वय का हवाला भी दे रहे हैं। वाजपेयी ने उस समय जदयू नेता जार्ज फर्नाडिस को राजग का संयोजक बनाया था, जिससे समन्वय बेहतर था। राकांपा की शिकायत है कि वे लोग संप्रग में रहने के नाते सरकार की हर बदनामी को तो ओढ़ रहे हैं, लेकिन नीतिगत फैसलों में उनसे चर्चा तक नहीं की जाती। जबकि वाजपेयी सरकार में राज्यपाल बनाने से लेकर केंद्र में बड़े अफसरों की नियुक्ति तक में सत्ता में हिस्सेदारी के सवाल पर सहयोगियों को पूरी तवज्जो दी जाती थी। राकांपा के एक बड़े नेता ने साफ कहा कि कांग्रेस हमसे समर्थन तो चाहती है, लेकिन भरोसा नहीं करती। मौजूदा स्थिति पर कांग्रेस नेता किसी तरह पवार का अहं तुष्ट करने में जुटे हैं। सरकार में नंबर दो का ओहदा पा चुके रक्षा मंत्री एके एंटनी ने साफ कहा भी कि सरकार में सब बराबर हैं। कोई नंबर दो नहीं। प्रधानमंत्री पहले ही उनकी शान में कसीदे काढ़ चुके हैं। इसी का नतीजा था कि राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने यह जरूर कहा कि राकांपा संप्रग का हिस्सा है और इसका हिस्सा बनी रहेगी। मगर सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस से कुछ ठोस हासिल करे बगैर राकांपा गठबंधन में रुकने को तैयार नहीं है।
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