शेर ने कुएं में झांका
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और लोकप्रिय कवि हैं...
शेर ने कुएं में झांका,
वहां पहले से बैठा था
एक शेर बांका।
ऊपर वाले शेर ने
पूरा दम लगाकर
मुंडी घुमाकर
दहाड़ लगाई,
चक्कर खाती हुई
प्रति की अति की प्रतिध्वनि
नीचे से आई -
मत मत मत मत
मत समझना मुझे
अपनी परछाईं
छाईं छाईं छाईं...।
बहुत देर पहले का
आया हुआ हूं
हुआ हूं हुआ हूं हुआ हूं...,
तुम्हारी महत्वाकांक्षाओं का
सताया हुआ हूं
हुआ हूं हुआ हूं हुआ हूं...।
अगले हफ्ते
जंगलपति का चुनाव है
नाव है नाव है नाव है...,
मेरा भी चाव है
चाव है चाव है चाव है...।
बाहर निकलूंगा
दहाड़ंूगा
और ऐंठ जाऊंगा,
ऊंगा ऊंगा ऊंगा...,
पांच सौ करोड़ दिलवाओगे
तो फिर से
पानी में बैठ जाऊंगा
ऊंगा ऊंगा ऊंगा...।
अशोक चक्रधर
खिली बत्तीसी...
क्या प्रतिध्वनियों का कोई अर्थ होता है।
लेखक वरिष्ठ साहित्यकार और लोकप्रिय कवि हैं...
शेर ने कुएं में झांका,
वहां पहले से बैठा था
एक शेर बांका।
ऊपर वाले शेर ने
पूरा दम लगाकर
मुंडी घुमाकर
दहाड़ लगाई,
चक्कर खाती हुई
प्रति की अति की प्रतिध्वनि
नीचे से आई -
मत मत मत मत
मत समझना मुझे
अपनी परछाईं
छाईं छाईं छाईं...।
बहुत देर पहले का
आया हुआ हूं
हुआ हूं हुआ हूं हुआ हूं...,
तुम्हारी महत्वाकांक्षाओं का
सताया हुआ हूं
हुआ हूं हुआ हूं हुआ हूं...।
अगले हफ्ते
जंगलपति का चुनाव है
नाव है नाव है नाव है...,
मेरा भी चाव है
चाव है चाव है चाव है...।
बाहर निकलूंगा
दहाड़ंूगा
और ऐंठ जाऊंगा,
ऊंगा ऊंगा ऊंगा...,
पांच सौ करोड़ दिलवाओगे
तो फिर से
पानी में बैठ जाऊंगा
ऊंगा ऊंगा ऊंगा...।
अशोक चक्रधर
खिली बत्तीसी...
क्या प्रतिध्वनियों का कोई अर्थ होता है।

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