Friday, August 3, 2012

अखाड़े से बाहर रहेंगे सुरेश के बेटे!

धनबाद झरिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की कुंती सिंह को कड़ी टक्कर देनेवाले कांग्रेस नेता सुरेश सिंह की पत्‍‌नी मनोरमा सिंह, बेटे अजय और संजय में से कोई भी झरिया के चुनावी अखाड़े में नहीं कूदेगा? क्या सुरेश सिंह की राजनीतिक विरासत उनके भतीजे बिहार जनता खान मजदूर संघ के महामंत्री रणविजय सिंह संभालेंगे? ये सवाल आज कोयलांचल की राजनीति में जोरशोर से उठ रहे हैं। हालांकि यह अकारण नहीं है। इसके पीछे मजबूत तर्क है। तर्क है बाघमारा विस सीट से कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदार रणविजय सिंह का झरिया प्रस्थान। युवा कांग्रेस ने पांच अगस्त को झरिया में उनका अभिनंदन समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसी बहाने रणविजय की झरिया में धमाकेदार इंट्री कराने की योजना है। अभिनंदन समारोह के नाम पर झरिया में रणविजय के बड़े-बड़े पोस्टर एवं बैनर लगाए गए हैं। इस बीच, धनबाद विधायक मन्नान मल्लिक ने जागरण से बातचीत में कहा है कि कांग्रेस सुरेश सिंह की शहादत को बेजा जाने नहीं देगी। उनकी की पत्‍‌नी या किसी बेटे को झरिया सीट से टिकट दिलाने की बात हुई है। अगर वे खुद लड़ें तो ठीक, अन्यथा वे जिसे चाहेंगे उसके नाम की अनुशंसा करेंगे। सुरेश सिंह ने पिछले विस चुनाव में कुंती को कांटे की टक्कर दी थी। संतोष सिंह पर साधा निशाना : इधर रणविजय सिंह के समर्थकों ने जिनमें फहीम खान के बेटे भी शामिल हैं ने कांग्रेस नेता संतोष सिंह पर जमकर निशाना साधा है। राजेन्द्र सिंह गुट को झटका : रणविजय की दावेदारी से नेता विपक्ष राजेन्द्र सिंह गुट को झटका लग सकता है। कारण, इस सीट से राजेन्द्र सिंह के करीबी माने जानेवाले संतोष सिंह भी टिकट के मजबूत दावेदार हैं। सुरेश के बेटे अगर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए तो मन्नान मल्लिक के समर्थक और सुरेश सिंह के रिश्तेदार होने के कारण रणविजय की स्थिति मजबूत हो सकती है।

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