Sunday, July 22, 2012
निजी स्कूल मौन परियोजना उदासीन
धनबाद : शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद निजी स्कूलों को संचालन के लिए मान्यता लेनी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस मामले में निजी स्कूल तो चुप हैं हीं शिक्षा परियोजना भी कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। गली-कूचों में निजी स्कूल बिना किसी नियम-कानून के चल रहे हैं। इन स्कूलों में न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही बच्चों को मिल रही है और न ही साफ-सफाई का ख्याल रखा जा रहा है। प्रावधान : आरटीई के तहत मान्यता लेनेवाले निजी स्कूलों को एक फार्म भरकर आरटीई सेल में जमा करना होगा। इस फार्म के माध्यम से निजी स्कूलों को पूरा ब्यौरा, पिछले तीन साल के दौरान कुल आय-व्यय, स्कूल के स्वरूप एवं क्षेत्र से संबंधित जानकारी, नामांकन स्थिति, स्वच्छता संबंधी विवरण, शिक्षकों एवं पाठ्यक्रम आदि की पूरी जानकारी देनी है। निरीक्षण : अधिनियम के तहत डीएसई को किसी भी निजी स्कूल के निरीक्षण का अधिकार दिया गया है। निजी स्कूलों को अपनी ओर से एक प्रावधान करना होगा जिसमें राज्य प्राधिकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी कभी भी विद्यालय का निरीक्षण कर सकते हैं। स्कूल समय-समय पर सभी जानकारियां और प्रतिवेदन डीएसई को देगा और विभागीय आदेशों का अनुपालन करेगा। व्यवस्था : गली-कूचों में चलनेवाले निजी स्कूलों को हर व्यवस्था से लैस होना होगा। ऐसा नहीं होने पर उनपर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार डीएसई को होगा। जो नहीं हुआ : अधिनियम के लागू होने के बाद से भी अधिकतर स्कूल इसमें रुचि नहीं ले रहे। मान्यता के लिए स्कूलों ने तो फार्म लिया, लेकिन जमा नहीं किया। जिन स्कूलों ने जमा किया भी है तो उनमें से अधिकतर के मामले पर अभी तक विभाग की ओर से कोई सुनवाई नहीं की गयी है।
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