Tuesday, July 3, 2012

आर्थिक समाचार

नई दिल्ली : कृषि मंत्री शरद पवार ने भी 2जी स्पेक्ट्रम नीलामी से पल्ला झाड़ लिया है। पवार ने सोमवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर स्पेक्ट्रम आवंटन पर गठित मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएम) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है। पत्र में पवार ने स्पेक्ट्रम आवंटन पर विवाद में उनका नाम घसीटे जाने की कुछ तत्वों की पूर्व की कोशिशों की ओर इशारा करते हुए ईजीओएम की अध्यक्षता के प्रति अपनी अनिच्छा जताई है। मंत्री ने कहा है कि यदि वह ईजीओएम की अध्यक्षता करते हैं तो उन तत्वों को उन्हें और बदनाम करने का बहाना मिल जाएगा। पवार को पिछले हफ्ते ही इस ईजीओएम का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके पहले पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी भरने से पहले इस ईजीओएम से किनारा कर लिया था। मुखर्जी के अलग होने के बाद पवार को इस ईजीओएम का नया अध्यक्ष बनाया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के सूत्रों ने बताया कि सोमवार शाम पवार का पत्र मिल गया है। उम्मीद इस बात की है कि प्रधानमंत्री पवार की इच्छा का सम्मान करेंगे। साथ ही अगले एक-दो दिनों के भीतर ईजीओएम के नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी। माना जा रहा है कि मनमोहन सिंह रक्षामंत्री एके एंटनी को यह जिम्मेदारी दे सकते हैं। चूंकि दूरसंचार मामले में गृहमंत्री पी चिदंबरम का भी नाम आ चुका है, इसलिए सरकार उनके नाम पर शायद ही विचार करे। अगर एंटनी नहीं मानते तो संचार मंत्री कपिल सिब्बल के नाम पर भी विचार हो सकता है। पवार के नेतृत्व में ईजीओएम की सोमवार को पहली बैठक प्रस्तावित थी। इसे अंतिम समय में टाल दिया गया। इसके बाद पवार ने बताया कि उनके पास कुछ अन्य काम हैं, इसलिए बैठक टाली गई है। यह बैठक अगले एक या दो दिनों के भीतर होगी। सरकारी सूत्र यह भी बता रहे थे कि ईजीओएम की आगामी बैठक का व्यापक एजेंडा पीएमओ ने तय कर दिया है। इस बैठक में नीलाम किए जाने वाले स्पेक्ट्रम का रिजर्व प्राइस, मोबाइल कंपनियों के मौजूदा स्पेक्ट्रम की नई कीमत तय करने जैसे मसलों पर फैसला होना है। इसके साथ ही अब सरकार अगस्त, 2012 तक जब्त स्पेक्ट्रम की नीलामी कर सकेगी या नहीं, इसको लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 122 कंपनियों के जब्त लाइसेंस की फिर से नीलामी अगले महीने के अंत तक पूरी की जानी है। अभी तक नीलामी प्रक्रिया से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर फैसला नहीं हो सका है। मुखर्जी की अध्यक्षता में गठित इस मंत्रिसमूह की पिछली बैठक 21 जून, 2012 को थी, लेकिन मुखर्जी अंतिम समय में इसमें हिस्सा लेने से मुकर गए थे। वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते थे। सूत्रों का कहना है कि पूर्व संचार मंत्री ए राजा के समय में स्पेक्ट्रम आवंटन में आरोपी बने एक दूरसंचार कंपनी के शेयरधारक के पवार के साथ संबंधों को लेकर पहले ही सवाल उठाए जाते रहे हैं। यह भी एक वजह है कि पवार पीछे हट गए हैं।

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