Sunday, August 5, 2012

झरिया की स्थिति गंभीर : वृंदा

धनबाद : माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने कहा है कि आग एवं भू-धंसान के कारण झरिया की स्थिति बहुत ही गंभीर है। ऐसे में झरिया को सिर्फ कोयला मंत्रालय के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। पीएमओ को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। ये बातें उन्होंने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहीं। वे मैथन में शनिवार से शुरू हुई प्रदेश माकपा की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने पहुंची हैं। उनके साथ प्रदेश माकपा के सचिव जीके बक्शी, पूर्व सचिव ज्ञान शंकर मजूमदार एवं सुरेश गुप्ता भी थे। वृंदा ने कहा कि केंद्र सरकार एवं झारखंड सरकार दोनों ही झरिया की अनदेखी कर रही है। झरिया को राष्ट्रीय आपदा घोषित करना चाहिए। झारखंड सरकार का रवैया आपराधिक है। ऐसा लगता है कि झारखंड सरकार को झरिया के आम आदमी की नहीं, सिर्फ कोयले की चिंता है। आखिर सरकार किस चीज का इंतजार कर रही है। जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा तभी सरकार चेतेगी। आज भी झरिया की आग पर काबू पाया जा सकता है। वहां के लोगों के पुनर्वास एवं वैकल्पिक रोजगार की योजना नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा पांच करोड़ अतिरिक्त अनाज के निर्यात के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि देश जब अकाल की चपेट में है तब ऐसा फैसला लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को रियायती दर पर सरकारी दुकानों के माध्यम से उक्त अनाज को गरीबों के बीच बांटना चाहिए। आवश्यक खाद्य पदार्थो को रियायती दरों पर जनता के बीच बांटने की भी मांग की। इन सवालों को लेकर पार्टी के महासचिव आज प्रधानमंत्री से मिलेंगे। इसके अलावा 12 सितंबर को एफसीआइ गोदामों एवं केंद्र सरकार के कार्यालयों पर माकपा धरना देगी। ईमानदारी से भी बन सकते हैं लूट का हिस्सा : टीम अन्ना के राजनीति में उतरने के फैसले पर कहा कि भारतीय संविधान में राजनीति में आने का सभी को अधिकार है। गरीबों को केंद्र बिंदु बनाकर ही विकल्प दिया जा सकता है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर ईमानदारी से भी बन सकते हैं लूट का हिस्सा।

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