Saturday, July 28, 2012

दहकेगा देशी कोयला

धनबाद महंगाई की लपटें निकट भविष्य में और भड़कने वाली हैं। पीएमओ की पहल पर देशी व आयातित कोयले के मूल्यों का एकीकरण होने जा रहा है। इससे कोल इंडिया के कोयले की कीमत में अच्छी-खासी वृद्धि होने जा रही है। अब महंगा विदेशी कोयला सस्ता तथा सस्ता देशी कोयला महंगा होगा। इससे थर्मल पावर प्लांटों में उत्पादित बिजली महंगी होगी। एकीकरण प्रस्ताव पर पीएमओ, ऊर्जा मंत्रालय व कोयला मंत्रालय के बीच मंथन अंतिम दौर में है। कोयले के दाम में इस वृद्धि से कोल इंडिया को कोई फायदा नहीं होने जा रहा है, उल्टे कोयले के आयात व आपूर्ति की उस पर अतिरिक्त जिम्मेवारी आने जा रही है। क्या है मामला : कोल इंडिया का इस साल का कोयला उत्पादन लक्ष्य 464 मिलियन टन है जबकि मांग व आपूर्ति के बीच मौजूदा खाई करीब 137 मिलियन टन है। यह खाई 2017 तक 185 मिलियन टन तक बढ़ सकती है। यह खाई आयात से ही भर सकती है। मगर यहां पेंच यह है कि विदेशी कोयला करीब दोगुना महंगा है। ऐसे में पीएमओ की ओर से पहल की गई है क्यों नहीं दोनों के मूल्य में एकीकरण कर एक औसत मूल्य पर सभी कोयला बेचा जाय। ऊर्जा मंत्रालय ने हाल में पीएमओ को सूचित किया है इस प्रस्ताव पर तमाम राज्यों में व्यापक सहमति है। इस पर कोल इंडिया बोर्ड की मंजूरी जरूरी है। क्या होगा असर : नए प्रस्ताव के अमल पर देश के पूर्वी भाग में स्थित तमाम पावर प्लांटों की बिजली दर में पश्चिमी भाग में स्थित प्लांटों की तुलना में अधिक वृद्धि होने की संभावना है। पूर्वी भाग के अधिकतर प्लांटों को देश कोयले का उपयोग करने के बावजूद नए सिस्टम के तहत कोयले का अधिक मूल्य चुकाना होगा। तटीय क्षेत्रों में स्थित प्लांटों की लागत में भी वृद्धि होगी क्योंकि वे 30 फीसद आयातित कोयले का उपयोग करेंगे।

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