किन बातों पर देंगे जोर
योजना
साक्षरता को बढ़ावा
रिजर्व बैंक ने जारी 'वित्तीय शिक्षा पर राष्ट्रीय रणनीति पत्र' के मसौदे में दिया बड़े अभियान का सुझाव
बिजनेस भास्कर त्न मुंबई
लोगों में वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए स्कूल स्तर पर ही बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन की जानकारी देने की कवायद की जा रही है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इस दिशा में पहल करते हुए 8वीं से आगे की कक्षाओं के पाठ्यक्रम में फाइनेंशियल एजुकेशन को स्थायी रूप से शामिल कर सकता है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को जारी 'वित्तीय शिक्षा पर राष्ट्रीय रणनीति पत्र' के मसौदे में कहा है कि फाइनेंशियल एजुकेशन एक बहुत ही महत्वपूर्ण जीवन कौशल है। इसलिए हमारे एजुकेशन सिस्टम को इस जीवन कौशल से अनिवार्य रूप से परिचित कराना चाहिए। इसके बिना शिक्षा अधूरी है। रिजर्व बैंक ने यह मसौदा टिप्पणियों और प्रतिक्रियाओं के लिए जारी किया है। साथ ही सभी सरकारी एजेंसियों की मदद से एक बड़ा अभियान वित्तीय जागरुकता के लिए चलाया जा रहा है ताकि देश को वित्तीय मामलों के प्रति सशक्त और जागरूक बनाया जा सके।
मसौदे में कहा गया है कि हमारे देश में बहुत से छात्रों को स्कूल स्तर से आगे की पढ़ाई करने का मौका नहीं मिल पाता है। यही बात छात्राओं के मामले में भी लागू होती है। ऐसे में स्कूल एजुकेशन में इस बात को ध्यान में रखने की जरूरत है कि ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए औपचारिक रूप से वित्तीय शिक्षा लेने का यह आखिरी अवसर हो सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि सीबीएसई ने वित्तीय साक्षरता के कदम की सराहना की है, क्योंकि किसी की भी जिंदगी में पर्सनल फाइनेंस को हैंडल करने के लिए यह बहुत उपयोगी है।
सीबीएसई सैद्धांतिक रूप से इस बात के लिए सहमत हुई है और फाइनेंशियल एजुकेशन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित करेगी। रिजर्व बैंक ने कहा है कि वित्तीय साक्षरता फैलाने के लिए बहुत से देश फाइनेंशियल एजुकेशन पर समन्वित राष्ट्रीय रणनीति अपना रहे हैं। मसौदे में कहा गया है कि राष्ट्रीय रणनीति का मकसद बड़े पैमाने पर वित्तीय शिक्षा अभियान चलाकर लोगों को अपनी पूंजी का बेहत प्रबंधन सिखाने में मदद करना है। वित्तीय मामलों की समझ बढऩे से लोग वित्तीय उत्पाद और सेवाओं का चयन बेहतर ढंग से कर सकेंगे। इससे उपभोक्ता संरक्षण और शिकायत निवारण तंत्र भी ज्यादा पारदर्शी हो सकेगा।
केंद्रीय बैंक का मानना है कि वित्तीय समावेशन और समावेशी विकास में वित्तीय साक्षरता और वित्तीय शिक्षा महत्वपूर्ण भूूमिका निभा सकते हैं। वित्तीय सेवाओं का लाभ ज्यादा बेहतर तरीके से इसके बाद लोग उठा सकते हैं। मसौदे में रिजर्व बैंक ने इस बात पर भी जोर दिया है कि निरक्षर लोगों को वित्तीय साक्षरता की इससे भी सख्त जरूरत है। निरक्षर लोगों को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने के लिए इन्नोवेटिव पाठ्यक्रम, कार्यप्रणाली और वितरण चैनल की जरूरत है।
जीवन में बचत का महत्व, जोखिम भरे लोन जो चुकाने की क्षमता से बाहर हों, वित्तीय सेक्टर के उचित संस्थानों से ही कर्ज लेने, लंबे समय तक की गई बचत से चक्रवृद्धि ब्याज के फायदे, पूंजी की वैल्यू, महंगाई दर, इंश्योरेंस की जरूरत आदि के बारे में समझ विकसित की जाएग। इसके अलावा विभिन्न मंत्रालयों, नियामकों, बैंकों, स्टॉक एक्सचेंज, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड्स आदि की कार्यप्रणाली के बारे में बताया जाएगा।
> सीबीएसई फाइनेंशियल एजुकेशन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित करेगा
> स्कूल स्तर से आगे की पढ़ाई नहीं कर पाने वाले छात्र-छात्राओं के जीवन में बड़ी काम आएगी
> वित्तीय मामलों की समझ बढऩे से लोग वित्तीय उत्पाद और सेवाओं का चयन बेहतर ढंग से कर सकेंगे
> करीब 50 करोड़ की युवा आबादी को बचत, निवेश, वित्तीय उत्पादों की जानकारी
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