Saturday, August 11, 2012

तो होगा दो हजार करोड़ का नुकसान

धनबाद झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार यानी माडा का धनबाद नगर निगम में विलय हो चुका है। अब समायोजन की तैयारी चल रही है। इसके लिए अपर जिला समाहर्ता की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी है जो विभिन्न पहलुओं की जांच कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। तब समायोजन को अमली जामा पहनाया जाएगा। इससे माडा की परिसम्पत्ति, देनदारी और कोर्ट केस निगम को चला जाएगा। उसपर पहले से दर्जनों कोर्ट केस लदे हुए हैं। ऐसे में माडा के लंबित कोर्ट केस को हैंडल करना आसान नहीं होगा, खासकर लैंड यूज टैक्स (भूमि उपयोग कर) और बाजार शुल्क को। जानकारों के मुताबिक दोनों केस माडा एक्ट अनुसार लड़े जा रहे हैं। निगम में समायोजन के बाद माडा एक्ट खत्म हो जाएगा। तब हाईकोर्ट में बाजार शुल्क और सुप्रीम कोर्ट में भूमि उपयोग कर का पक्ष कमजोर हो जाएगा। वैसी परिस्थिति में दोनों मामला संबंधित संस्थान व राज्य सरकार के हाथ से निकल जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो डेढ़ हजार करोड़ से अधिक का नुकसान होगा। अभी भूमि उपयोग कर से 1252 करोड़ और बाजार फीस से सिर्फ बीसीसीएल से 214 करोड़ रुपया मिल रहा है। अन्य कंपनियों की राशि जोड़ने पर आंकड़ा दो हजार करोड़ से पार जा सकता है। इसमें 40 फीसद राशि सरकार और 60 फीसद राशि माडा को मिलनी है। केस अटकने की हालत में संबंधित संस्थान को तो नुकसान होगा ही, राज्य सरकार को भी करीब 800 करोड़ रुपये की हानि होगी।

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